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35 वर्षो से लगातार गणेश चतुर्थी पर किया जा रहा अखण्ड जलाभिषेक व पाठ

गणेश मंदिर में आज सुबह 6 बजे से कल सुबह 6 बजे तक होगा 24 घंटे अखण्ड जलाभिषेक, अखण्ड श्रीगणपति अथर्व शीर्षम पाठ

जलाभिषेक का जल लगभग 100 फीट भूमि में जाता है जिससे जल संरक्षण संवर्धन की मिल रही सीख

धमतरी। कल गणेश चतुर्थी पर्व हर्षोल्लास से मनाया जायेगा, जगह-जगह भगवान श्री गणेश विराजेंगे। पर्व को लेकर गणेश मंदिरो में भी विशेष तैयारियां की जा रही है। मठमंदिर चौक स्थित श्री सिद्धीविनायक गणेश मंदिर में हर साल 24 घंटे का अनवरत जलाभिषेक भगवान को किया जाता है, इस बार भी मंदिर में 24 घंटे का अखण्ड जलाभिषेक रखा गया है. जो आज सुबह 6 बजे तक प्रारंभ होकर कल सुबह 6 बजे तक अनवरत जारी रहेगा। वहीं आज प्रात: 6 बजे से मंदिर में अखण्ड श्रीगणपति अथर्व शीर्षम पाठ किया जा रहा है। जिसमें विद्वानों आचार्य पंडित होमनप्रसाद शास्त्री, पं. कामेश्वर पाण्डेय, पं. श्रीकांत तिवारी, पं. चिरागधर दीवान, पं. नरेशधर दीवान पं. पं. वैभवधर दीवान, नीतिन दिवान, पं. सुरेन्द्र पाण्डेय, द्वारा अखण्ड पाठ किया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि गणेश मंदिर में सुबह से ही भक्तों का तांता लगा हुआ है। वहीं आज शाम से भक्तों की भीड़ और भी बढ़ जायेगी जो कल दिन भर रहेगी। पं. श्रीकांत तिवारी ने चर्चा के दौरान बताया कि गणेश चतुर्थी पर भगवान के दर्शन व पूजा अर्चना का पूण्य लाभ होता है। उल्लेखनीय है कि 1992 में मंदिर का पुन: जीर्णोद्धार हुआ। वहीं 1993 से जलाभिषेक प्रारंभ हुआ। आज 35वें वर्ष भी अखण्ड जलाभिषेक जारी है। बता दे कि मंदिर में जलाभिषेक का जल लगभग 100 फीट भूमि में जाता है। जिससे जल संरक्षण संवर्धन का भी संदेश दिया जा रहा है। पंडितो ने बताया कि जलाभिषेक करने का विधान है। श्रीगणेश जलात्व के देव है। जिसका अभिषेक ताम्र के पात्र में 108 क्षिद्र या सहस्त्र क्षिद्र से करने का विधान है। इससे सभी प्रकार के मनोकामनाएं पूर्ण होती है।
सन् 1932 में हुआ मंदिर ट्रस्ट का गठन
उल्लेखनीय है कि मठमंदिर चौक स्थित श्री सिद्धिविनायक मंदिर एक प्राचीन मंदिर है। बताया जाता है कि मंदिर ट्रस्ट का गठन सन 1932 में हुआ उस दौरान मंदिर स्थल पर श्री गणेश की एक छोटी प्रतिमा थी जिसके पश्चात धीरे-धीरे मंदिर का रुप बढ़ा। सिद्धिविनायक के स्थापना का स्पष्ट उल्लेख नहीं है।
गणेश चतुर्थी पर होगा श्रृंगार, हवन पूजन, महाआरती व प्रसादी वितरण
अखण्ड जलाभिषेक के पश्चात कल भगवान श्री सिद्धिविनायक का प्रात: 8 बजे से विशेष श्रृंगार किया जावेगा तथा 10 बजे से हवन पूजन एवं 12 बजे महाआरती प्रसाद भोग वितरण प्रसादी वितरण किया जाएगा। मंदिर के पुजारी आचार्य पंडित होमन महाराज ने बताया कि गणपति भगवान को जल अर्पण करने से मन की शांति बुद्धि की स्थिरता और अहंकार का नाश होता है समस्त विघ्न बाधा दोष दूर होते हैं इस जलाभिषेक में महिलाएं भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लेती हैं।
कई वर्षों के पश्चात बन रहा ब्रह्म व मुद्गल योग का दुर्लभ संयोग
इस बार तीज और चतुर्थी का विशेष दुर्लभ संयोग प्राप्त हो रहा है एक तरफ महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके अखंड सौभाग्य की कामना करेंगे और साथ ही साथ भगवान श्री गणेश की पूजा स्थापना करके सुख समृद्धि और विघ्नों से मुक्ति की कामना की जावेगी कई वर्षों के पश्चात यह दुर्लभ संयोग बन रहा है एक तरफ ब्रह्म योग और दूसरा मुद्गल योग बन रहा है जो प्रथम बार तीज व्रत प्रारंभ कर रही हैं उनके लिए भी या अत्यंत लाभकारी और शुभ अवसर है ब्रह्म योग और मुद्गल योग क्या है ब्रह्म योग ज्योतिष के 27 लोगों में से 25 व योग ब्रह्म योग है यह योग ज्ञान बुद्धि शांति और सर्वोच्च का प्रतीक है इस योग से ग्रहों की स्थिरता शुभ फल देने वाली होती है इस योग में कोई भी नया कार्य करने की शुरुआत का फल स्थाई और अत्यंत शुभ माना गया है मुद्गल योग यह योग भी ज्योतिष का ही एक सहयोग है जो ग्रह नक्षत्र के मेल से बनता है इसका सीधा संबंध भगवान गणेश के नाम से वह मुद्गल ऋषि द्वारा रचित मुद्गल पुराण में गणेश जी के अवतारों के वर्णन से जुड़ा है यह समस्त संकटों का नाश करने वाला माना गया है।

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