Uncategorized

डीजे-धुमाल के कानफोड़ू शोर पर नहीं लग पा रहा लगाम, सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों की उड़ रही धज्जियां

समय सीमा का भी नहीं हो रहा पालन, बुजुर्गों, मरीजों और विद्यार्थियों की बढ़ी परेशानी


धमतरी। जिले में शादी-विवाह, धार्मिक, सांस्कृतिक आयोजनों व जुलूस और अन्य आयोजनों में डीजे व धुमाल की तेज आवाज आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बनती जा रही है। मुख्य मार्गों और रिहायशी इलाकों में देर रात तक बजने वाले कानफोड़ू डीजे, बाजे के कारण बुजुर्गों, बीमारों, छोटे बच्चों और विद्यार्थियों को सबसे अधिक दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट और ध्वनि प्रदूषण संबंधी नियमों में तय समय सीमा तथा ध्वनि स्तर के निर्देश होने के बावजूद जिले में इनका प्रभावी पालन होता नजर नहीं आता। रात बढऩे के साथ कई आयोजनों में डीजे व बाजे की आवाज और तेज कर दी जाती है, जिससे आसपास रहने वाले लोग चैन की नींद तक नहीं सो पाते। अस्पतालों, क्लीनिकों और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में भी तेज ध्वनि से मरीजों की परेशानी बढऩे की शिकायतें सामने आती रही हैं।
मुख्य मार्गों के दुकानदार भी परेशान
शहर के प्रमुख मार्गों के किनारे स्थित दुकानदारों का कहना है कि अत्यधिक तेज आवाज के कारण ग्राहकों से सामान्य बातचीत करना मुश्किल हो जाता है। कई बार सड़क पर डीजे वाहनों के कारण यातायात भी प्रभावित होता है, जिससे व्यापार पर असर पड़ता है। कई व्यापारियों ने मांग की है कि प्रशासन को सख्ती बरतते हुए नियमों का पालन कराया जाना चाहिए। ताकि सेहत पर खतरा न हो।
समय सीमा की अनदेखी
लोगों का आरोप है कि कई आयोजनों में निर्धारित समय सीमा के बाद भी डीजे, धुमाल बजते रहते हैं। ध्वनि प्रदूषण नियमों के अनुसार रात्रि के समय ध्वनि नियंत्रण के स्पष्ट प्रावधान हैं, लेकिन इनका पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है। वैसे तो पुलिस और प्रशासन रात्रि 10 बजे के बाद ध्वनि प्रदूषण पर रोक लगाने की बाते कहती है लेकिन धरातल पर इसका पालन बिल्कुल नहीं हो पा रहा है।
सेहत पर पड़ रहा असर
विशेषज्ञों के अनुसार लंबे समय तक अत्यधिक तेज ध्वनि के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, तनाव, अनिद्रा और हृदय रोगियों की परेशानी बढऩे का खतरा भी रहता है। छोटे बच्चों और बुजुर्गों पर इसका असर अधिक गंभीर हो सकता है।
सख्त निगरानी और कार्रवाई की मांग
शहरवासियों ने प्रशासन और पुलिस से मांग की है कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और ध्वनि प्रदूषण नियमों का सख्ती से पालन कराया जाए। डीजे व धुमाल की आवाज तय सीमा से अधिक होने पर कार्रवाई की जाए तथा समय सीमा का उल्लंघन करने वालों पर प्रभावी नियंत्रण किया जाए, ताकि आम लोगों को राहत मिल सके।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!