पर्युषण पर्व के सातवें दिन श्री पाश्र्वनाथ जिनालय में गूंजा धर्मज्ञान
भगवान पाश्र्वनाथ, नेमीनाथ और आदिनाथ परमात्मा के जीवन चरित्र से श्रद्धालुओं ने ग्रहण की करुणा, संयम और धर्म की प्रेरणा

धमतरी। धर्मनगरी धमतरी के इतवारी बाजार स्थित श्री पाश्र्वनाथ जिनालय में चातुर्मास हेतु विराजित परम पूज्य प्रवर्तनी महोदया कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या, प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा-4 के सानिध्य में पर्युषण पर्व के सातवें दिन श्रद्धालुओं ने धर्मज्ञान और आध्यात्मिक प्रेरणाओं का लाभ लिया। प्रवचन के दौरान परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने कहा कि पर्युषण पर्व के सात दिन कब आए और कब बीत गए, इसका पता ही नहीं चला। ज्ञानी भगवंतों ने कहा है कि पर्व के दिन संकरे अर्थात छोटे होते हैं। इसलिए इन पावन दिनों में प्रत्येक व्यक्ति को अपना स्व-मूल्यांकन करना चाहिए कि हमने इन दिनों में क्या पाया और क्या खोया। उन्होंने कहा कि जीवन में माता-पिता के उपकार को कभी नहीं भूलना चाहिए तथा धर्म के माध्यम से अपने जीवन को सार्थक बनाने का प्रयास करना चाहिए। भगवान पाश्र्वनाथ के चरित्र से हमे अहिंसा की प्रेरणा मिली है। नेमीनाथ परमात्मा के चरित्र में करुणा और त्याग का संदेश मिला है। आदिनाथ परमात्मा के चरित्र में धर्म को प्राथमिकता देने का संदेश है। प्रवचन के दौरान साध्वी श्री ने कहा कि धर्म कार्य में विलंब न हो, आत्मकल्याण को प्राथमिकता दें।
