तपस्वियों के सम्मान में निकली भव्य बरघोड़ा यात्रा, जगह-जगह हुआ स्वागत अभिनंदन
तप बघामणा महोत्सव में गूंजा धर्म और साधना का संदेश, शांतिनाथ भगवान की भव्य शोभायात्रा ने बांधा आध्यात्मिक समां
पंच परमेष्ठी श्रेणी तप के सभी तपस्वी रत्न, गुरुकृपा तप के तपस्वी सहित बड़ी संख्या में समाजजन हुए शामिल

धमतरी । जैन समाज में तप, त्याग और आत्मशुद्धि की भावना को समर्पित तप बघामणा महोत्सव श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया गया। तपस्वियों की इस साधना और त्याग के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए श्री संघ की ओर से भव्य बरघोड़ा निकाला गया। बरघोड़े में परमात्मा शांतिनाथ भगवान विराजमान रहे। तपस्वियों के लिए विशेष रूप से आकर्षक बग्घियां सजाई गई थीं, जिनमें तपस्वी विराजमान हुए। भव्य बरघोड़ा श्री पाश्र्वनाथ जिनालय से प्रारंभ होकर शहर के विभिन्न मार्गों से होते हुए शांति वाटिका, सिहावा चौक पहुंचा, जहां तपस्वियों के सम्मान का भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। बरघोड़े के दौरान जगह-जगह जैन समाज सहित अन्य समाज के लोगों ने श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वागत किया। धार्मिक वातावरण में निकली शोभायात्रा ने शहर में आध्यात्मिक माहौल बना दिया।
तपस्या में तपता तो शरीर है, लेकिन निखरती आत्मा है – परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी
इस अवसर पर परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से तपस्या के आध्यात्मिक महत्व को समझाया। उन्होंने कहा कि तपस्या में तपता तो शरीर है, लेकिन निखरती आत्मा है। तप वह माध्यम है, जिसके द्वारा मनुष्य अपने कर्मों का क्षय कर आत्मिक शुद्धि की ओर आगे बढ़ सकता है। परम पूज्य महाराज साहेब ने तत्त्वार्थ सूत्र का उल्लेख करते हुए बताया कि आचार्य उमास्वाति जी ने तप के माध्यम से कर्मों की निर्जरा का मार्ग बताया है। उन्होंने कहा कि तप को अग्नि के समान माना गया है। जिस प्रकार अग्नि मलिनता को जला देती है, उसी प्रकार तपरूपी अग्नि कर्मों के बंधन को क्षीण करने का माध्यम बनती है। उन्होंने कहा कि तप केवल शरीर को कष्ट देने का नाम नहीं है, बल्कि यह आंतरिक और बाह्य स्वरूप को निखारने तथा जीवन में अनुशासन लाने की साधना है। जैन दर्शन में तप के बारह प्रकार बताए गए हैं, जिनमें छह बाह्य तप और छह अभ्यंतर तप शामिल हैं। इन तपों के माध्यम से मनुष्य अपने जीवन को संयम, साधना और आत्मशुद्धि की दिशा में आगे बढ़ा सकता है।
चातुर्मास से चल रही तप आराधना का होगा समापन
महोत्सव के दौरान बताया गया कि गुरुकृपा तप एवं पंचपरमेष्ठी तप चातुर्मास प्रारंभ होने के साथ ही निरंतर चल रहे हैं, जिनका समापन अगले दिन होगा। इसी उपलक्ष्य में तपस्वियों के सम्मान के लिए भव्य तप बधावना महोत्सव आयोजित किया गया। मौसम की विपरीत परिस्थितियों के बावजूद तपस्वियों ने अपनी तपस्या को श्रद्धा और उत्साह के साथ पूर्ण किया। तप बधावना महोत्सव केवल तपस्वियों के सम्मान का अवसर नहीं रहा, बल्कि इसने त्याग, संयम, साधना और आत्मशुद्धि की जैन परंपरा को भी जन-जन तक पहुंचाया।
विधायक, महापौर व भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष ने किया बरधोड़ा का स्वागत, तपस्वियों का अभिनंदन कर लिया आशीर्वाद

श्री जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक संघ द्वारा आयोजित आत्म स्पर्शी चातुर्मास 2026 के तहत तप वर्धामणा महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। महोत्सव के दूसरे दिन आज सुबह जैन समाज का भव्य बरघोड़ा निकाला गया। बरघोड़ा श्री पाश्र्वनाथ जिनालय से प्रारंभ होकर शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए शांति वाटिका पहुंचा। बरघोड़ा में पंच परमेष्ठी श्रेणी तप के सभी तपस्वी रत्न, गुरुकृपा तप के तपस्वी सहित बड़ी संख्या में समाज के महिला, पुरुष और युवा शामिल हुए। इस अवसर पर विधायक ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा एवं भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष एवं पूर्व विधायक श्रीमती रंजना डीपेंद्र साहू ने बरघोड़ा का आत्मीय स्वागत किया। उन्होंने तपस्वियों का अभिनंदन कर उनका आशीर्वाद लिया।

