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जीवन में सत्य, अहिंसा, तप और दान जैसे गुणों को धारण करना चाहिए- डॉ अनिल रावत

शिव सरोवर परिसर में अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के उपलक्ष्य में संगम गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन कार्यक्रम का आयोजन


धमतरी। प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, धमतरी के तत्वावधान में शिव सरोवर परिसर में अंतर्राष्ट्रीय वृद्ध दिवस के उपलक्ष्य में संगम गौरवपूर्ण वृद्धावस्था एवं सम्मानित जीवन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य वरिष्ठजनों के अनुभवों का सम्मान करने के साथ उन्हें आध्यात्मिक ज्ञान, सकारात्मक सोच एवं राजयोग के माध्यम से सम्मानित और आनंदमय जीवन जीने के लिए प्रेरित करना था। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में भ्राता डॉ. विनोद कुमार पाठक , प्राचार्य, बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव शासकीय महाविद्यालय, धमतरी; डॉ. अनिल रावत वरिष्ठ चिकित्सक, धमतरी; भ्राता डॉ. प्रभात गुप्ता , वरिष्ठ चिकित्सक, धमतरी; भ्राता डी.पी. जोशी , वरिष्ठ अधिवक्ता, धमतरी; राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी , संचालिका, ब्रह्माकुमारीज धमतरी तथा ब्रह्माकुमारी प्राजक्ता दीदी , राजयोग शिक्षिका, धमतरी विशेष रूप से उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का शुभारंभ परमात्मा की स्मृति के पश्चात अतिथियों के सम्मान एवं दीप प्रज्वलन से हुआ। प्रेरणा गीत ब्रह्माकुमारी साधना बहन जी ने प्रस्तुत की। अति विशिष्ट अतिथि डॉ. विनोद कुमार पाठक जी ने कहा कि वरिष्ठजनों के सम्मान के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम अत्यंत सराहनीय हैं। उन्होंने ब्रह्माकुमारीज परिवार का हृदय से धन्यवाद देते हुए कार्यक्रम के लिए शुभकामनाएं प्रेषित कीं। वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. अनिल रावत ने ब्रह्माकुमारीज परिवार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि जीवन के एक पड़ाव के बाद सम्मान प्राप्त होना भी व्यक्ति के मानवीय गुणों और उसके श्रेष्ठ कर्मों का परिणाम है। उन्होंने रामचरितमानस का उदाहरण देते हुए कहा कि हमें अपने जीवन में सत्य, अहिंसा, तप और दान जैसे गुणों को धारण करना चाहिए। भ्राता श्री डॉ. प्रभात गुप्ता ने भी अपनी शुभकामनाएं देते हुए अपने दिल के उद्गार प्रकट किया । वरिष्ठ अधिवक्ता डी.पी. जोशी ने कहा कि इस प्रकार के कार्यक्रम में आकर उन्हें अत्यंत प्रसन्नता हुई। उन्होंने कार्यक्रम की सराहना करते हुए अपने हृदय के भाव व्यक्त किए। राजयोगिनी ब्रह्माकुमारी सरिता दीदी जी ने कहा कि एक समय था जब हमारे जीवन में साधन कम थे, लेकिन साधना अधिक थी। आज परमपिता परमात्मा स्वयं हमें जीवन जीने की कला और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों को प्रारंभ से ही श्रेष्ठ संस्कार देने चाहिए तथा अपनी संस्कृति और माता-पिता के सम्मान की भावना उनमें विकसित करनी चाहिए। बुजुर्गों के पास जीवन का अमूल्य अनुभव होता है। उन्होंने कहा कि उम्र बढऩे का अर्थ जीवन से पीछे हटना नहीं है। ब्रह्माकुमारीज में अनेक वरिष्ठ भाई-बहन स्वयं को बुजुर्ग न मानकर विद्यार्थी समझते हैं और प्रतिदिन आध्यात्मिक शिक्षा प्राप्त करते हैं। उन्होंने वरिष्ठजनों को जीवन की चुनौतियों का सामना करते हुए सदैव सही मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी। साथ ही कहा कि घर के बच्चों पर शासन करने के बजाय उन्हें प्रेमपूर्वक परामर्श और मार्गदर्शन देना चाहिए। ब्रह्माकुमारी प्राजक्ता दीदी जी ने स्वागत भाषण में अतिथियों एवं वरिष्ठजनों का सम्मान करते हुए कहा कि जीवन में जब हम श्रेष्ठ संकल्प करते हैं कि हमें कुछ अच्छा करना है, तो हमारी चेतना जागृत होती है और जीवन को सही दिशा मिलती है। उन्होंने वरिष्ठजनों से अपने जीवन के सुंदर क्षणों को अनुभव करने और सकारात्मकता के साथ आगे बढऩे का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि वरिष्ठजनों के लिए डिवाइन क्लब की शुरुआत करने का संकल्प लिया गया है, जिसमें प्रत्येक माह एक दिन विशेष रूप से वरिष्ठ भाई-बहनों के लिए विभिन्न गतिविधियां, राजयोग एवं आध्यात्मिक ज्ञान का आदान-प्रदान तथा कमेंट्री के माध्यम से मेडिटेशन कराया जाएगा।कार्यक्रम का संचालन बहन कामिनी कौशिक ने किया। इस अवसर पर भ्राता लक्ष्मण पहलवान जी, (शहीद विनोद चौबे राज्य अलंकरण पुरस्कार से सम्मानित) सहित सभागार में विभिन्न कार्य क्षेत्रों से पधारे वरिष्ठजनों का सम्मान किया गया। वरिष्ठ जनों ने रोचक, मनोरंजक एक्टिविटी में उमंग उत्साह से भाग लिया।कार्यक्रम के अंत में उपस्थित सभी वरिष्ठजनों को सम्मान पट्टा ,माला पहनाकर सम्मानित किया गया।

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