भाजपा की अराजकता हटाओ रैली और राज्योत्सव की चकाचौंध में डूबा साय प्रशासन, एग्रीस्टेक के लिए भटक रहे किसान – तारिणी चंद्राकर

चक्रवाती तूफान और बेमौसम बारिश से छत्तीसगढ़ का अन्नदाता पूरी तरह बर्बाद हो चुका है। खेतों में डूबी फसलें किसानों की सालभर की मेहनत और आंसुओं की गवाह बनी हुई हैं, लेकिन संवेदनशील होने का दम भरने वाली साय सरकार को किसानों की आवाज सुनाई नहीं दे रही है। जिला कांग्रेस कमेटी धमतरी की अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर ने साय सरकार की किसान विरोधी नीतियों पर एक बार फिर तीखा प्रहार करते हुए कहा की पूरा प्रशासनिक अमला इस समय किसानों की सुध लेने के बजाय भारतीय जनता पार्टी की राजनीतिक नौटंकी और उत्सवों की सेवा में लगा दिया गया है। तारिणी चंद्राकर ने अपने बयान में सरकार की असंवेदनशीलता को उजागर करते हुए कहा कि धमतरी जिले सहित पूरे प्रदेश का किसान आज बेबस है। पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण फसल नुकसान का सर्वे और ‘एग्रीस्टेक’ (डिजिटल फसल सर्वेक्षण) का काम पूरी तरह ठप पड़ा है। किसान दर-दर भटक रहे हैं, लेकिन जिले का पूरा प्रशासनिक तंत्र और आला अधिकारी किसानों की समस्याओं को सुलझाने के बजाय भारतीय जनता पार्टी की ‘अराजकता हटाओ रैली’ की व्यवस्था में व्यस्त हैं। अधिकारियों को किसानों के खेतों में जाकर नुकसान का जायजा लेने की फुर्सत नहीं है, क्योंकि उनके ऊपर सत्ताधारी दल के राजनीतिक कार्यक्रमों को सफल बनाने का दबाव है। कांग्रेस ने राज्योत्सव के नाम पर हो रहे फिजूलखर्च और तमाशे पर कड़ा ऐतराज जताया है। तारिणी चंद्राकर ने कहा कि एक तरफ छत्तीसगढ़ का किसान अपनी बर्बादी पर रो रहा है, वहीं दूसरी तरफ राज्योत्सव के मंच पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय सहित उनका पूरा मंत्रिमंडल परदेसिया (बाहरी) कलाकारों की कला का आनंद ले रहा है। जब प्रदेश का अन्नदाता संकट में हो, तब सरकार का इस तरह का जश्न मनाना छत्तीसगढ़िया संस्कृति और किसानों का घोर अपमान है। उन्होंने कहा कि सरकार ने बिना सोचे-समझे एग्रीस्टेक की जो नई व्यवस्था थोपी है, उसने किसानों की कमर तोड़ दी है। पटवारियों की हड़ताल के कारण किसानों का एग्रीस्टेक सत्यापन नहीं हो पा रहा है। इसके बिना किसान सोसायटियों में अपना धान नहीं बेच पाएंगे। एक तरफ बारिश ने धान की क्वालिटी खराब कर दी है, और दूसरी तरफ प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसान तकनीकी तौर पर धान बेचने के लिए अपात्र होने की कगार पर हैं। सरकार तुरंत पटवारियों से संवाद कर उनकी हड़ताल समाप्त कराए। प्रशासनिक अधिकारियों को वीआईपी ड्यूटी से हटाकर तत्काल प्रभावित खेतों में फसल नुकसान के सर्वे के लिए भेजा जाए। एग्रीस्टेक की वजह से जो किसान धान बेचने से वंचित हो रहे हैं, उनके लिए वैकल्पिक व व्यावहारिक व्यवस्था लागू की जाए। तारिणी चंद्राकर ने साफ कहा कि छत्तीसगढ़ का किसान इस अपमान और अनदेखी को बर्दाश्त नहीं करेगा। यदि सरकार ने जश्न छोड़कर तुरंत राहत कार्य शुरू नहीं किए, तो कांग्रेस पार्टी किसानों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ उग्र आंदोलन का शंखनाद करेगी।

