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सरोजनी चौक व डबरापारा कुरूद में मनमोहक रूप में विराजी महालक्ष्मी

मूलचन्द सिन्हा 

कुरूद-धनतेरस के पर्व के साथ ही रोशनी के महापर्व दीपावली का उल्लास प्रारंभ हो गया है।नगर में पूरी उमंग के साथ धनतेरस का महापर्व धूमधाम के साथ मनाया गया।नगर में सरोजनी चौक व डबरा पारा में प्रतिवर्ष की परंपरा अनुसार धन की देवी मां लक्ष्मी की मनमोहक प्रतिमा की स्थापना की गई है.मुकेश कश्यप ने जानकारी देते हुए बताया कि कुरूद में हर साल धूमधाम के साथ पर्व मनाने की परंपरा रही है। जिसमे नगर के मुख्य मार्ग पर सरोजनी चौक में विराजित मां लक्ष्मी की मूर्ति की सामूहिक रूप से पूजा-अर्चना कर पर्व को एकरूपता देकर समरसता का संदेश दिया जाता है।सरोजनी चौक और डबरा पारा में हर साल पर्व को धूमधाम के साथ मनाया जाता है।पांचों दिन माता रानी की धूमधाम से पूजा की जाती है और भाईदूज के दिन विधिवत रूप से शोभायात्रा निकालकर विसर्जन किया जाता है।शुक्रवार को दोनो ही स्थानों पर महाराज जी के सानिध्य में विधिवत आरती पूजन कर प्रसाद वितरण कर जनकल्याण की कामना की गई।पौराणिक कथाओं के अनुसार दिवाली के पांच दिवसीय महोत्सव के दौरान ही देवताओं और राक्षसों द्वारा किए गए सागर मंथन से मां लक्ष्मी उत्पन्न हुई थीं,इसलिए दिवाली को उनका जन्म दिवस भी माना जाता है. साथ ही यह भी मान्यता है कि दिवाली की रात को मां लक्ष्मी ने भगवान विष्णु को पति के रूप में चुना और उनसे विवाह किया। इस दौरान सभी देवी-देवता उनके विवाह में शामिल हुए. इसलिए दिवाली का त्योहार बहुत ही धूमधाम के साथ मनाया जाता है और इस दिन विधि-विधान से मां लक्ष्मी का पूजन किया जाता है।मान्यता है कि इस दिन मां लक्ष्मी प्रसन्न रहती हैं और जो लोग उस दिन उनकी पूजा करते है आने वाले दिनों में मानसिक, शारीरिक दुखों से दूर सुखी रहते हैं।मान्यताओं के अनुसार भगवान राम द्वारा रावण को मारने और माता सीता को लंका से वापस लाने के 20 दिन बाद दिवाली मनाई गई थी. क्योंकि इसके बाद ही भगवान राम अपनी पत्नी सीता और भाई लक्ष्मण के साथ 14 वर्ष का वनवास काटकर वापस अयोध्या लौटे थे. उनके स्वागत के लिए पूरा अयोध्या शहर सजाया गया था. लोगों ने अपने राजा का स्वागत करने के लिए शहर को दीयों से सजाया। तब से दिवाली के दिन मिट्टी के दीयों से सजावट की जाती है और इस त्योहार को मनाया जाता है. इसके अलावा एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार दिवाली के दिन भगवान विष्णु की वैकुण्ठ में वापसी होती है और इस दौरान मां लक्ष्मी उनका स्वागत करती हैं।यह जानकारी मुकेश कश्यप ने दी।

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