Uncategorized

बच्चों में बढ़ता जा रहा डायबिटीज का खतरा, टाईप 2 शुगर से बच्चे पीडि़त

जेनेटिक टाईप 1 के साथ ही असंयमित दिनचर्या के चलते टाईप-2 मरीजों की भी संख्या में हो रही तेजी से वृद्धि

धमतरी। देश में तेजी से शुगर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है। एक अनुमान के मुताबिक 10 करोड़ से अधिक मरीज देश में है। सामान्यत: पहले अधेड़ावस्था व बुजुर्गो को ही टाईप-2 शुगर होता था लेकिन पिछले कुछ सालों में बच्चों व युवाओं को भी टाईप-2 शुगर होने तेजी से होने लगा है। जिससे उनकी सेहत पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। बता दे कि जिला अस्पताल में डायबिटीज जांच की पूरी सुविधा है। साथ ही सम्पूर्ण दवाई किट आदि भी प्रदान किया जाता है। बताया जा रहा है कि जिला अस्पताल में 27 डायबिटीज के मरीज पंजीकृत है। जो कि मात्र 6 से 16 साल के बच्चे है। यह जेनेरिक टाईप 1 के मरीज नहीं बल्कि टाईप -2 के मरीज है। यह खतरे की घंटी है। बता दे कि यह आंकड़े सिर्फ जिला अस्पताल के है जबकि जिले में डायबिटीज से पीडि़त बच्चों की संख्या हजारों में हो सकती है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2015-16 में 668, वर्ष 2016-17 में 6513 और 2017-18 में 1056 तथा 2018-19 में 1231, 2019-20 में 2026, 2020-21 में 1289 और 2021-22 में 1586, 2022-23 में 1567, 2023-24 में 1732 डायबिटीज पीडि़तों की पहचान हुई है। यह शासकीय अस्पताल का आकड़ा है। जबकि निजी अस्पताल में सैकड़ों डायबिटीज के मरीज नियमित उपचार करवा रहे है। बता दे कि इसे सायलेंट किलर बीमारी माना जाता है। अन्य बीमारियों की तरह इस बीमारी का पता चलने में ही काफी समय लग जाता है। इसके बाद यह बीमारी का उपचार जीवन पर्यन्त चलता रहता है। उक्त लाईलाज बीमारी में दवाईयों से ज्यादा परहेज दिनचर्या और खानपान में नियंत्रण महत्वपूर्व होता है। उक्त बीमारी के कारण शरीर के कई अंग एक समय बाद काम करना बंद कर सकते है। साथ ही मधुमेह से शरीर का रोग प्रतिरोधक क्षमता काफी कम हो जाती है। इसलिए कई बीमारियां हमे घेर लेती है।


वृहद अभियान चलाकर, नये मरीजों की पहचान है जरुरी
पूर्व में सरकार द्वारा शुगर मरीजों की पहचान करने एक व्यापक अभियान चलाने की योजना बनाई थी जिसके तहत टीम घर-घर जाकर मरीजों की जांचकर शुगर की पड़ताल करती लेकिन यह योजना धरातल पर उतर ही नहीं पाई। इस प्रकार के अभियान से डायबिटीज पीडि़तों की सही संख्या का पता चल पायेगा। और सही समय में जानकारी होने से मरीजों की सेहत भी ठीक रहेगी।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!