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नक्सल प्रभावित व वनाचंल क्षेत्रो में डिजिटल इंडिया योजना का है बुरा हाल

नेटवर्क की समस्या से शिक्षा, स्वास्थ्य अन्य इमरजेंसी सुविधाओं का बेहतर तरीके से नहीं मिल पा रहा लाभ

5 जी के जमाने में इंटरनेट तो दूर कॉल कनेक्टिविटी के लिए भी जूझ रहे हजारों लोग
धमतरी। जिले के नक्सल प्रभावित और वनाचंल क्षेत्र में भी कई ऐसे क्षेत्र है जहां आज भी लोग शहरी सुविधाओं से दूर सालों पुराने समय में जीवन जी रहे है। आज जमाना 5जी का है, लेकिन जिले के कुछ ऐसे गांव भी है जहां 5 जी और इंटरनेट तो दूर की बात कॉल कनेक्टिविटी की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। ऐसे में केन्द्र सरकार के डिजिटल इंडिया योजना का यहां बुरा हाल है।
ज्ञात हो कि धमतरी जिले के नगरी सिहावा क्षेत्र के कई गांव ऐसे है जहां मोबाईल नेटवर्क या नही है और यदि है तो बमुश्किल कॉल लग पाता है। कॉल लग भी जाये तो ठीक से बात नहीं नहीं हो पाता, इसे ग्रामीणों को कई प्रकार की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इंटरनेट, नेटवर्क के कारण यहां बच्चे आनलाईन शिक्षा ग्रहण करने से वंचित रहते है। कोरोना काल के दौरान भी जब स्कूले बंद रही शिक्षा आनलाईन दी जा रही थी तो यहां के बच्चें शिक्षा अर्जित नहीं कर पाये। वर्तमान दौर में इंटरनेट के माध्यम से देश दुनिया से मोबाईल पर ही कनेक्ट हो सकते है। लेकिन इन सुविधा का लाभ भी इन्हें नहीं मिल पा रहा है। शिक्षा के अतिरिक्त बेहतर स्वास्थ्य सुविधायें भी प्रभावित हुई है। जब कभी कोई आपातकालीन स्थिति उत्पन्न हो जाती है तो नेटवर्क की कमी के कारण एम्बुलेंस को बुलाया नहीं जा सकता। और यदि किसी प्रकार सम्पर्क हो भी जाये तो घोर पिछड़ा इलाका होने के कारण घंटो के इंतजार करना पड़ता है। बता दे कि जिले के आरमुड़ा, नयापारा, सांकरा, लिटीपारा चिवर्री, करौहा, सांरगपुरी, कुकरीकोन्हा, कुम्हाड़ाकोट, खैरभर्री, बगरुमनाला, बिटलीगपारा, गोंदलानाला, आदि कई गांव है। जहां मोबाईल नेटवर्क नहीं बताता। सालों से ग्रामीण इस क्षेत्र में मोबाईल टावर लगाने की मांग करते रहे है। लेकिन अभी तक कई गांवो में समस्या जस की तस है। यहां तक नक्सल मोर्चो पर तैनात जवानों व सीतानदी अभरण्य क्षेत्रो के ग्रामीण को भी कमजोर कनेक्टिविटी की समस्या से जूझना पड़ता है।


आनलाईन फार्म जमा करने, अन्य कार्यो के लिए आना पड़ता है ब्लाक मुख्यालय
बता दे कि नगरी ब्लाक मुख्यालय से कई गांवो की दूरी कई किमी तक है। ऐसे में लंबी दूरी तय करके उन्हें आनलाईन फार्म जमा करने या अन्य शासकीय योजनाओं के लिए फार्म भरने आना पड़ता है। ऐसे में ग्रामीणों को काफी परेशानी होती है। कुछ गांव ऐसे है जहां तक न तो कोई बस चलती है न कोई अन्य परिवहन के साधन, पगडंडी रास्तों से गुजर कर ग्रामीणों घंटो के सफर के बाद ब्लाक मुख्यालय पहुंचते है नेटवर्क के साथ ही यह क्षेत्र विकास में भी पिछड़ा हुआ है। सड़क नाली, पानी स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरुरतों से भी लोग जूझ रहे है। शासन-प्रशासन द्वारा इन क्षेत्रो का विकास का प्रयास तो किया जा रहा है, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली है।

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