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पारंपरिक तरीके से श्रीराम मंदिर में मनाई गई रंगपंचमी


कुरुद। बुधवार को श्रीराम मंदिर परिसर में फाग मंडली ने पारंपरिक नगाड़े, ढोलक, झांझ-मंजीरा और बांसुरी के साथ फाग गीत गाए और होली के उल्लास को चार चांद लगा दिए। होली खेले रघुवीरा अवध में जैसे प्रसिद्ध फाग गीतों पर श्रोतागण मस्ती में झूम उठे। इस उत्सव ने एक ओर जहां धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों को पुन: जीवित किया, वहीं दूसरी ओर श्रोताओं को पुराने जमाने की मिठास और समृद्ध परंपराओं से जोड़ा। मंहत अखिलेश वैष्णव ने बताया कि 1753 से इस स्थल पर धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सवों की परंपरा रही है। आजकल के परिवर्तित समय में जहां डीजे और फिल्मी गाने होली के जश्न का हिस्सा बन गए हैं, वहाँ हम इस बसंतोत्सव का आयोजन कर रहे हैं ताकि लोग अपनी लोक संस्कृति और पारंपरिक उत्सवों से जुड़ें रहें। उन्होंने बताया कि रंगपंचमी पर यहां फूलों की होली खेली जाती है, जिससे न केवल संस्कृति का संरक्षण होता है, बल्कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी किया जाता है। बसंत उत्सव में नपं अध्यक्ष ज्योति भानु चंद्राकर, जनपद सदस्य सिन्धु बैस, नीरज चंद्राकर, मनोज त्रिपाठी, कैलाश शुक्ला, धीरज चंद्राकर, राघवेन्द्र सोनी, जमाल रिजवी, निलेश कुमार, टिकेश्वर चंद्राकर, देवराज साहू, सुनिल, जितेन्द्र चंद्राकर, हरिश देवांगन, योगेन्द्र सिन्हा, तामेश्वर, कार्तिक राम, भारत साहू, सचिन पुरी, हिरदेश सिन्हा, कल्पना देवी, अभिषेक, पाखी, वेदांत वैष्णव, किशोर, होरी यादव, धनेश्वर, डुगेश साहू शामिल थे।

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