Uncategorized

साहित्यकार, पद्मश्री सुरेन्द्र दुबे के निधन पर विधायक अजय चन्द्राकर ने जताया शोक


कुरुद। हास्य और व्यंग्य के मंच पर जिनकी रचनाएँ केवल तालियाँ नहीं, सोच भी पैदा करती थीं। ऐसे अद्भुत साहित्यकार, पद्मश्री सुरेंद्र दुबे का निधन छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक चेतना के लिए एक अपूरणीय क्षति है। जिनकी लेखनी विचारों की गूंज बनकर जनमन में समा जाती थी, उनके चले जाने से प्रदेश के साहित्य जगत में गहरा सन्नाटा है। इसी शोकपूर्ण क्षण में शनिवार को पूर्व मंत्री एवं कुरुद विधायक अजय चंद्राकर रायपुर स्थित उनके निवास पहुँचे। उन्होंने शोकसंतप्त परिजनों से भेंट कर अपनी संवेदनाएँ व्यक्त की। उन्होंने कहा आज शब्द मौन हैं, व्यंग्य निर्वाक है और कविता शोकसागर में डूबी हुई है। हमने केवल एक देह को खोया है, लेकिन सुरेंद्र दुबे जी की रचनाएँ, उनके विचार और उनका प्रखर हास्यबोध सदा जीवित रहेंगे। श्री चंद्राकर ने कहा कि पद्मश्री सुरेंद्र दुबे ने छत्तीसगढ़ी भाषा और संस्कृति को राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई। उनके व्यक्तित्व में गहराई, सरलता और व्यंग्य की धार एक साथ समाहित थी। वे केवल कवि नहीं थे, समाज के सजग द्रष्टा थे जिन्होंने हँसाते हुए भी समाज को आईना दिखाया। उनका योगदान युगों तक स्मृतियों में जीवित रहेगा। इस अवसर पर साहित्य, कला और संस्कृति से जुड़े कई लोग भी उपस्थित रहे।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!