जीव जैसा कर्म करता है उसे वैसा ही फल मिलता है – परम पूज्य प्रशम सागर जी म. सा.

धमतरी। परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि आज पर्वाधिराज पर्युषण पर्व का आज तीसरा दिन है। इस पर्व का 2 दिन कैसे निकल गया पता ही नहीं चला। समय उस रेत के समान है जो हाथ से निकलते जा रहा है और हमें उसका पता ही नहीं चलता। परमात्मा पाश्र्वनाथ का जीवन चरित्र हमने कल सुना था। कि कोई भी जीव जैसा कर्म करता है कभी न कभी उसे उसके कर्मों का फल जरूर मिलता है। हमें प्रयास करना है कि हम जैसा फल चाहते है वैसा ही कर्म करें। हमें मनोबल को इतना बढ़ाना है कि संसार के सभी जीवों को क्षमा दे सके और क्षमा मांग सके। अपने अंदर के कषाय को निकाल सके। अपने अंदर के दुर्गुणों को निकाल सके।
श्रावकों को अपना घर ऐसे स्थान पर बनाना चाहिए जो जिन मंदिर अर्थात उपाश्रय के आसपास हो। इससे गृहस्थ को सुपात्रदान का अवसर मिलता है। भगवान महावीर के जीवन में छह कल्याणक हुए। सामान्यत: तीर्थंकर परमात्मा के पांच कल्याणक होते है। सबसे पहले परमात्मा का च्यवन कल्याणक होता है च्यवन अर्थात अंतिम बार किसी माता की कोख में आना। इसके बाद इस संसार में नहीं आने होगा। दूसरा कल्याणक है जन्म कल्याणक। अर्थात अंतिम बार किसी माता के गर्भ से संसार में आना। तीसरा दीक्षा कल्याणक अर्थात परमात्मा संसार में आकर संयम जीवन स्वीकार करते है। पांच महाव्रत धारण करते है। चौथा केवलज्ञान कल्याणक इस संसार में हम अज्ञानता के कारण भटक रहे है। केवलज्ञान प्राप्त होने के बाद इस संसार का सम्पूर्ण ज्ञान प्राप्त हो जाता है, जिसके कारण पुन: इस संसार में आगमन नहीं होगा। पांचवां निर्वाण कल्याणक परमात्मा अपने अंतिम भव में इस संसार को छोड़कर सिद्ध,बुद्ध और मुक्त हो जाते है।

