कर्म करते समय ध्यान नहीं रखते लेकिन कर्म किसी को नहीं छोड़ता – परम पूज्य प्रशम सागर जी म.सा.

धमतरी. परम पूज्य उपाध्याय प्रवर अध्यात्मयोगी महेंद्र सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य उपाध्याय प्रवर युवामनीषी स्वाध्याय प्रेमी मनीष सागर जी महाराज साहेब के सुशिष्य परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब परम पूज्य योगवर्धन जी महाराज साहेब श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार धमतरी में विराजमान है। आज परम पूज्य प्रशम सागर जी महाराज साहेब ने प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि यह पर्वाधिराज पर्युषण पर्व उचित अवसर के रूप में हमे प्राप्त हुआ है। हम इस अवसर का कितना लाभ उठाते है ये हमारी योग्यता पर निर्भर करता है। कल्पसूत्र का वाँचन पहले केवल साधु साध्वियों के मध्य होता है। किंतु अब पूरे श्रीसंघ में किया जाता है। कल्पसूत्र के माध्यम से साधु साध्वियों के लिए कुछ नियम बताए गए है। कर्म किसी को भी नहीं छोड़ता। हम कर्म बांधते समय ध्यान नहीं रखते । इसलिए ऐसे कर्मों का जब उदयकाल होता है तब हम दुखी हो जाते है। जिनवाणी का हम रसपान कर रहे है। इस जिनवाणी के माध्यम से परमात्मा के जीवन को जानने का समझने का प्रयास करना है।
