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छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति हमारी अस्मिता और गौरव की प्रतीक है – हरख जैन

भरथरी की कथा पर छत्तीसगढ़ी लोक नृत्य व संगीत की मनमोहक प्रस्तुति


भखारा। दुर्गा उत्सव समिति एवं बस्ती पंचायत के तत्वाधान में मुरकु पारा में एक भव्य सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें छत्तीसगढ़ की लोकधारा से ओतप्रोत भरथरी की कथा का प्रभावशाली मंचन किया गया। लोक नृत्य और लोक संगीत की यह प्रस्तुति दर्शकों विशेष रूप से महिलाओं के लिए आकर्षण का केंद्र बनी रही।भरथरी गीत की विशेषताए यह है कि यह गीत राजा भरथरी की कहानियों पर आधारित है, जिसमें उनके राज्य छोडऩे, योगी बनने और गुरु गोरखनाथ के शिष्य बनने का उल्लेख होता है। कार्यक्रम में लोक चिन्हारी संस्था के लोक कलाकार दीनानाथ साहू एवं श्रीमती हेमलता पटेल (सीकोसा) ने अपनी शानदार प्रस्तुति से भरथरी की अमर कथा को जीवंत कर दिया। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदर की थाप और छत्तीसगढ़ी सुरों की मधुरता और लोक नृत्य से सजी इस प्रस्तुति ने दर्शकों को लोकसंस्कृति की गहराइयों से जोड़ दिया। इस अवसर पर मुख्य रूप से उपस्थित हरख जैन पप्पू ने अपने उद्बोधन में कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति हमारी अस्मिता और गौरव की प्रतीक है। भरथरी जैसी कथाएँ हमें त्याग, समर्पण और जीवन के मूल्यों का संदेश देती हैं। ऐसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़े रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। दर्शकों ने दोनों कलाकारों सहित नर्तक दल और वादक कलाकारों की प्रस्तुति की भरपूर सराहना की और दुर्गा उत्सव समिति सहित बस्ती पंचायत के इस सांस्कृतिक प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रमों से नई पीढ़ी में लोकसंस्कृति के प्रति सम्मान और रुचि दोनों बढ़ती है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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