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धूमधाम से कुरूद में निकली गौरी-गौरा की बारात, नाचते गाते किया गया परम्परा का निर्वहन

गौरी-गौरा पर्व छत्तीसगढ़ की परंपरा का विशेष उत्सव है - भानू चन्द्राकर

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कुरूद। लक्ष्मी पूजा के बाद अंचल में गोवर्धन पर्व हर्षोल्लास से मनाया गया। गौरी गौरा उत्सव की कुरूद नगर में धूम रही। बता दे कि दीपावली के पहले गौरी-गौरा जगाने की परंपरा के साथ पर्व की शुरुआत हुई, इसके उपरांत विभिन्न विधि विधानो के साथ दीपावली की मध्य रात्रि को भगवान शिव और माता पार्वती की बारात निकाल कर नगर के विभिन्न गौरा चौकों में इसे विराजित किया गया, धूमधाम के साथ गौरी-गौरा की विसर्जन यात्रा निकाली गई। एक दुसरे को बधाई देते हुए त्यौहार की खुशियां बांटी। इस बीच नगर के संजय नगर, डिपो रोड़, सरोजनी चौक, शांति नगर, बैगा पारा, पचरीपारा, सिरसा चौक, गोडपारा, शीतला पारा, दानीपारा सहित विभिन्न वार्डो में पारंपरिक रूप से गड़वा बाजा की मनभावन धुनो में इस उत्सव को मनाया गया। दीये की रोशनी, फटाखे की गूंज इस उत्सव की रौनकता में चार चांद लगा रही थी।दीपावली की रात गौरी गौरा उत्सव को लेकर रौनकता बनी रही। बुधवार को सुबह नगर पालिका अध्यक्ष ज्योति चंद्राकर और विधायक प्रतिनिधि भानु चंद्राकर ने नगर के विभिन्न वार्डो में माता गौरी और भोले बाबा की पूजा आराधना करके नगर और क्षेत्र के विकास की कामना की।उन्होंने अपने संदेश में कहा कि गौरी-गौरा पर्व छत्तीसगढ़ की परंपरा का उत्सव है, जो पूरे देश में दीपावली पर्व को विशेष बनाता है। नगर पालिका उपाध्यक्ष देवव्रत साहू ने परिवार सहित गौरी-गौरा की पूजा आराधना की। इसी तरह नगर पालिका के नेता प्रतिपक्ष और दानी पारा वार्ड के पार्षद डूमेश साहू ने भी गौरी-गौरा की पूजा आराधना करते हुए इस पर्व को छत्तीसगढ़ की इस गौरवशाली परंपरा की धरोहर बताया। वहीं वरिष्ठ पार्षद रजत चंद्राकर, पूर्व एल्डरमैन मनोज अग्रवाल अपने परिवार सहित इस उत्सव में शामिल हुए। विदित है कि छत्तीसगढ़ में गऊरा गऊरी उत्सव बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। यह शिव गऊरा और पार्वती गऊरी को समर्पित है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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