दीवारें बनीं शिक्षक, बच्चे बने जिज्ञासु : धमतरी का अभिनव बाला मॉडल
खेल-खेल में सीखने की पहल : बाला कॉन्सेप्ट पर आधारित आंगनवाड़ी केंद्रों से बदलती तस्वीर

धमतरी, 09 दिसंबर 2025/ प्रारंभिक बाल शिक्षा को अधिक प्रभावी, आकर्षक और बच्चों की सहज सीखने की प्रक्रिया के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से धमतरी जिले में बाला (Building as Learning Aid) कॉन्सेप्ट आधारित आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण एक महत्वपूर्ण नवाचार के रूप में उभर रहा है। यह पहल न केवल शिक्षण-सीखने की गुणवत्ता को बढ़ा रही है, बल्कि बच्चों को एक ऐसे रचनात्मक वातावरण से जोड़ रही है जहाँ वे खेल-खेल में ज्ञान अर्जित कर सकें।
बाला कॉन्सेप्ट का मूल विचार यह है कि भवन स्वयं बच्चों का शिक्षक बन जाए। इस मॉडल में दीवारों, फर्श, खिड़कियों, दरवाजों, सीढ़ियों यहां तक कि बाहरी खुली जगहों को भी सीखने के साधनों के रूप में विकसित किया जाता है। अक्षर, संख्याएँ, रंग, आकार, मौसम, स्थानीय परिवेश से जुड़े चित्र, दिशासूचक संकेत, ऊँचाई नापने के चार्ट जैसे अनेक तत्व सहज रूप से बच्चों तक ज्ञान पहुंचाते हैं। इससे बच्चों में जिज्ञासा बढ़ती है, स्मरण शक्ति बेहतर होती है और सीखने की प्रक्रिया सक्रिय एवं आनंददायी बन जाती है।
इसी अभिनव सोच को मूर्त रूप देते हुए धमतरी जिला प्रशासन ने मनरेगा, महिला एवं बाल विकास विभाग (ICDS) तथा 15 वें वित्त आयोग के वित्तीय सहयोग से जिले में 81 बाला मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों का निर्माण प्रारंभ किया है। इनमें से 38 केंद्र पूर्ण हो चुके हैं, जबकि शेष पर तेजी से कार्य जारी है। हाल ही में कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने विकासखंड धमतरी के ग्राम उड़ेंना में निर्मित नवीन आंगनवाड़ी केंद्र का निरीक्षण किया। लगभग 11.69 लाख रुपये की लागत से तैयार यह भवन न सिर्फ आकर्षक है, बल्कि बाला कॉन्सेप्ट की सभी विशिष्टताओं को समाहित करते हुए सीखने का आदर्श वातावरण प्रस्तुत करता है। निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर संतोष व्यक्त करते हुए शेष कार्य को भी निर्धारित समयसीमा में बेहतर गुणवत्ता के साथ पूर्ण करने के निर्देश दिए।
उड़ेंना की यह आंगनवाड़ी केंद्र ग्रामीण क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना का उदाहरण प्रस्तुत करती है। केंद्र की दीवारों पर स्थानीय संस्कृति, जीव-जंतु, पेड़-पौधों के चित्रों से लेकर बुनियादी गणित और भाषा सीखने वाले चार्ट तक सृजनात्मक रूप से उकेरे गए हैं। फर्श को विभिन्न रंगों और आकारों से सजाया गया है, जिससे बच्चे खेलते-खेलते संख्याओं और आकृतियों को आसानी से पहचान सकें। सीढ़ियों पर गिनती, दरवाजों पर अक्षर तथा खिड़कियों पर दिशात्मक संकेत उन्हें प्रतिदिन नयी सीख प्रदान करते हैं। यह व्यवस्था उन छोटे बच्चों के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो दृश्य-आधारित सीखने से तेजी से ज्ञान अर्जित करते हैं। बाला कॉन्सेप्ट के तहत बने इन आंगनबाड़ी केन्द्रों से विशेष पिछड़ी जनजाति कमार वर्ग के नवनिहाल बच्चे खेल-खेल में ज्ञान अर्जित कर रहे हैं।
कलेक्टर श्री मिश्रा का मानना है कि प्रारंभिक शिक्षा जीवन की मजबूत नींव होती है, और यह पहल बच्चों के लिए प्रेरणादायक, सुरक्षित तथा आकर्षक वातावरण तैयार करते हुए इस नींव को और मजबूत बनाएगी। बाला मॉडल आंगनवाड़ी केंद्र न केवल बच्चों में सीखने की रुचि बढ़ा रहे हैं, बल्कि माता-पिता को भी यह विश्वास दिला रहे हैं कि उनके बच्चों को गुणवत्तापूर्ण प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त हो रही है।
धमतरी जिले की यह पहल बाला कॉन्सेप्ट को वास्तविक धरातल पर उतारते हुए एक प्रेरक सफलता कहानी बन चुकी है। यह मॉडल आने वाले वर्षों में पूरे प्रदेश में प्रारंभिक शिक्षा के स्तर को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की ठोस आधारशिला के रूप में स्थापित होगा।


