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अभिषेक गजेन्द्र: एग्रोनॉमी से आधुनिक पोल्ट्री उद्यमिता,सोच बदली, किस्मत बदली, सरकारी योजना बनी संबल

धमतरी -धमतरी जिले के सेमरा (बी), भाखरा, के अभिषेक गजेन्द्र ने यह सिद्ध कर दिया कि सही शिक्षा और सही दिशा मिल जाए, तो गाँव से भी आधुनिक उद्यम खड़ा किया जा सकता है। साधारण परिवार से आने वाले अभिषेक ने कृषि में एम एस सी(अग्रॉनामी) की पढ़ाई के बाद क्षेत्रीय कृषि-पशुपालन की वास्तविक चुनौतियों को समझा। उन्होंने नौकरी के बजाय उद्यमिता का मार्ग चुना।
वर्ष 2023–24 में अभिषेक ने ब्रॉयलर कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग की शुरुआत की। आई बी ग्रुप के तकनीकी मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और वैक्सीनेशन प्रोटोकॉल से उन्होंने वैज्ञानिक तरीके से पोल्ट्री फार्म स्थापित किया। 270×40 फीट के आधुनिक शेड में 13,000 चूजों की क्षमता के साथ उनका फार्म आज उच्च मानकों पर संचालित हो रहा है।
पशुधन विकास विभाग की ‘बैकयार्ड कुक्कूट पालन प्रोत्साहन योजना’ से उन्हें 25 प्रतिशत शासकीय अनुदान की प्रथम किस्त प्राप्त हुई। इस सहायता ने उनके आत्मविश्वास को मजबूती दी और विस्तार की राह खोली। सरकारी योजना ने उनके सपनों को पंख दिए।
लगभग 50 लाख के निवेश से शुरू हुआ यह उद्यम आज आर्थिक स्थिरता का उदाहरण बन चुका है। बैंक से 20 लाख का ऋण लेकर उन्होंने साहसिक निर्णय लिया। प्रति वर्ष 6 उत्पादन चक्रों से लगभग ₹20 लाख की वार्षिक आय और करीब ₹18 लाख का शुद्ध लाभ प्राप्त हो रहा है। कॉन्ट्रैक्ट मॉडल ने जोखिम कम किया और आय को सुरक्षित बनाया।अभिषेक की सफलता का आधार है बेहतर प्रबंधन। स्वच्छता, तापमान नियंत्रण, लाइटिंग और दाना प्रबंधन पर वे विशेष ध्यान देते हैं। उन्होंने (इंविरोंमेन्टल कण्ट्रोल) फार्मिंग तकनीक अपनाई, जिससे उत्पादन और गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार हुआ।
पशुधन विकास विभाग के निरंतर मार्गदर्शन से उनका फार्म और अधिक सक्षम बना। उनके उत्कृष्ट कार्य से प्रभावित होकर कलेक्टर श्री अबिनाश मिश्रा ने भी फार्म का दौरा किया। यह सम्मान उनकी मेहनत की पहचान है।
आज अभिषेक न केवल अपने परिवार को आर्थिक रूप से सशक्त बना रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार भी सृजित कर रहे हैं। गाँव के युवा उनसे प्रेरणा लेकर पोल्ट्री उद्यमिता की ओर बढ़ रहे हैं।
भविष्य में अभिषेक दूसरा आधुनिक पोल्ट्री शेड बनाने, उत्पादन क्षमता दोगुनी करने और हैचरी व प्रोसेसिंग यूनिट की दिशा में कार्य करने का लक्ष्य रखते हैं।
अभिषेक गजेन्द्र की मेहनत बताती है कि सरकारी योजनाएँ, वैज्ञानिक सोच और मेहनत से ग्रामीण समृद्धि होती है ।इनकी मेहनत और कहानी हर किसान और युवा के लिए प्रेरणा है।

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