पराली जलाने पर 15 हजार तक जुर्माना फिर भी कई किसान जला रहे पराली
फल अवशेष जलाना पर्यावरण, मिट्टी की उर्वरता और जन स्वास्थ्य के लिए है हानिकारक
सिर्फ अपील कर भूल जाते है अधिकारी, जांच निरीक्षण व कार्रवाई नहीं होने से खेतो से उठ रहा धुआं

धमतरी। धान की फसल कटाई के बाद खेतो में बचे फसल अवशेष को कई किसानों द्वारा जला दिया जाता है। किसानों को लगता है कि इससे वे आसानी से दूसरी फसल के लिए खेत को तैयार कर रहे है। जबकि इस खेत की मिट्टी की उर्वरता क्षमता वायु प्रदूषण आदि होता है। हर बार की तरह इस बार भी जिला प्रशासन और कृषि विभाग द्वारा किसानों से फसल अवशेष न जलाने की अपील की गई है। लेकिन इसका शत् प्रतिशत पालन नहीं हो रहा है।
बता दे कि जिले में पराली जलाने पर प्रतिबंध है। साथ जुर्माने का भी प्रावधान है। एक एकड़ पर 2500 और 5 एकड़ से अधिक फसल अवशेष जलाने पर 15 हजार रुपये तक जुर्माने का प्रावधान है। बाउजूद इसके कई किसान रोजाना अपने खेतो में फसल अवशेष जला रहे है।
उल्लेखनीय है कि पराली जलाना न सिर्फ अगले फसल व मिट्टी की उर्वरता के लिए नुकसानदायक है। बल्कि पर्यावरण के लिए भी घातक है। आज देश के कई शहरो में वायु प्रदूषण का स्तर खतरे के निशान से ऊपर पहुंच चुका है। ठंड में यह समस्या और भी विकराल हो चुका है। ऐसे में पराली जलाना वायु प्रदूषण को बढ़ावा देने के समान है। हर बार की तरह इस बार भी किसानों से पराली न जलाने की अपील की गई है, लेकिन इसका पालन होते नजर नहीं आ रहा है। कई किसान समय के साथ जागरुक हुए है वे अब पराली जलाने के स्थान पर पैरा कटाई कर पशु चारे व अन्य कार्यो में उपयोग करते है, लेकिन कुछ किसान आज भी जागरुकता का परिचय नहीं दे रहे है।