बिना टोटी के नल व लिकेज से रोजाना व्यर्थ बह जाता है हजारों लीटर पानी
लोगो में जागरुकता की कमी से नहीं रुक रही पानी की बर्बादी

धमतरी। जल्द ही गर्मी की दस्तक होगी। आने वाले दिनों में भीषण गर्मी पड़ेगी और जल संकट गहरा सकता है। ऐसे में पानी की किल्लत आम बात है, लेकिन लोग जल बचाने रुचि नही दिखा रहे है। जिससे रोजाना हजारों लीटर पानी की बर्बादी हो रही है।
ज्ञात हो कि शहर में सभी वार्डो में निगम द्वारा बोर कराया गया है। जिसे पाईप लाईन से जोड़कर घर घर पानी सप्लाई किया जाता है। इससे अतिरिक्त नल जल योजना के तहत शहर में पाईप का जाल बिछाया गया है। जहां रोजाना सुबह शाम टंकियों से पानी सप्लाई किया जाता है। लेकिन बोर के पाईप में लिकेज के कारण रोजाना पानी व्यर्थ बह जाता है। वही वार्डो में कई स्थानों पर सार्वजनिक नल भी लगाया गया है। साथ ही कई घरो के नल सड़क किनारे लगे है। इन नलों में टोटी लगाना अनिवार्य है। लेकिन कुछ लापरवाह और शरारती तत्वों द्वारा टोटी को निकाल दिया जाता है। जिससे व्यर्थ ही काफी पानी बह जाता है। इससे रोजाना हजारों लीटर पानी की बर्बादी होती है। जागरुकता के बाद भी लोग टोटी को सिर्फ इसलिए निकाल देते है कि पानी की धार कम आती है लेकिन पानी की बर्बादी को नजरअंदाज कर देते है। कुछ स्थानो पर तो टोटी को चोरी भी कर लिया जाता है। गत वर्ष कुछ समाजसेवको द्वारा जल संरक्षण के लिये विशेष अभियान भी चलाया था। जिसके तहत फ्री में नलों में टोटी लगाई गई थी। बाउजूद इसके पानी की बर्बादी नहीं थमी। एक ओर देश के कई हिस्सों में लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे है। वहीं दूसरी ओर यहां प्रकृति मेहरबान है तो बेधड़क पानी की बर्बाद किया जा रहा है। उस पर न ही रैन वाटर हार्वेस्टिंग पर या वाटर लेवल बनाये रखने उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
वाटर मीटर से ही रुक सकती है पानी की बर्बादी
पानी की जरुरत से ज्यादा उपयोग व बर्बादी रोकने राज्य सरकार द्वारा हर घर में जहां शासकीय नल कनेक्शन है उनमें वाटर मीटर लगाने की योजना पर पूर्व में विचार किया जा चुका है। इसके तहत नलों में लगे वाटर मीटर जितना पानी खपत होगा निर्धारित दर के हिसाब से किराया लिया जाना था। वर्तमान में एक मामूली किराये से महीने भर पानी सुबह-शाम घंटो उपलब्ध कराया जाता है। जिसका भी दुरुपयोग होता है। यदि वाटर मीटर की योजना धरातल पर लागु हो जाती तो निश्चित ही इससे पानी की बर्बादी में काफी हद तक कमी आती, लेकिन उक्त योजना धरातल पर नहीं आ पाई।

