जिला बनने के 27 सालों बाद भी व्यवसायिक शिक्षा में पिछड़ा धमतरी जिला
शिक्षा ग्रहण करने अन्य शहरों में जाना पड़ता है छात्रों को
मेडिकल, इंजीनियरिंग के साथ ही अन्य कई क्षेत्र की शिक्षण संस्थाओं की है दरकार
रायपुर, दुर्ग भिलाई, बिलासपुर की तरह नहीं बन पाया धमतरी एजुकेशन हब

धमतरी । आज के दौर में शिक्षा के साथ ही जीविकापार्जन और आय का साधन बनाने पर जोर दिया जाता है। इसलिए छात्र-छात्राएं और परिजनों द्वारा न सिर्फ रुचि बल्कि शिक्षा से जुड़े भविष्य और रोजगार के अवसर पर भी ध्यान देकर शिक्षा अर्जित की जाती है। इसलिए आज के दौर में व्यवसायिक शिक्षा की डिमांड सबसे ज्यादा है। , लेकिन विडंबना है। धमतरी जिला अन्य क्षेत्रों की भांति ही व्यवसायिक शिक्षा के मामले में भी पिछड़ा हुआ है। इसलिए यहां के छात्र-छात्राओं को स्कूली शिक्षा ग्रहण करने के बाद व्यवसायिक शिक्षा ग्रहण करने अन्य बड़े शहरों की दौड़ लगानी पड़ती है। अन्य शहरों में कोर्स करने के कारण किराये का मकान, हॉस्टल, आवागमन, भोजन आदि अन्य अतिरिक्त खर्च लगते है। जो कि गरीब व मध्यम वर्गीय परिवार के लिए संभव नहीं हो पाता है। ऐसे में कई होनहार छात्र-छात्रायें चाहकर भी दूसरे शहरों में शिक्षा ग्रहण करने नहीं जा पाते। छात्र-छात्राओं के भविष्य और जिले में शिक्षा सुविधाओं और रोजगार के अवसर बढ़ाने विभिन्न शिक्षा क्षेत्रो के कालेज खुलने की आवश्यकता है।
व्यवसायिक शिक्षा के है कई प्रकार व उद्देश्य
व्यवसायिक शिक्षा में व्यक्ति के रोजगार, क्षमताओं और उसकी रुचि अनुसार शिक्षा व रोजगार देना शिक्षा के सुअवसरों में विभिन्नता लाना, विद्याथिर्यों में आत्म विश्वास लाना, निरउद्देश्य और रुचिविहीन उच्च शिक्षा प्राप्त विद्याथिर्यों को विकल्प उपलब्ध कराना, अधिक संख्या में स्वरोजगार आधारित पाठ्यक्रमों को तैयार करना आदि इसके तहत विभिन्न पाठ्यक्रम जैसे कम्प्युटर, बैंकिंग, वित्त, पर्यटन, व्यापार, आटोमोबाईल, यांत्रिकी, वेल्डर, होटल मैनेजमेंट, फैशन डिजायनिंग, इंटीरियर डिजायनिंग, पैरामेडिकल, कृषि, वाणिज्य, प्रौद्योगिकी, गृह विज्ञान मानविकी, आदि है। इनमें अधिकांश कोर्स की जिले में शिक्षा ग्रहण करने कोई व्यवस्था नहीं है।
रोजगार व्यापार के लिए भी है आवश्यक
जिन-जिन शहरों में शिक्षा के व्यापक व बेहतर सुविधायें छात्र-छात्राओं को प्रदान किया गया है उन शहरो का विकास तेजी से हुआ है। यहां रोजगार और व्यापार तेजी से बढ़ा है। इसलिए धमतरी में व्यवसायिक शिक्षा के विकल्प बढऩे, शैक्षणिक संस्थान खुलने से धमतरी जिले के विद्याथिर्यों को तो सुविधा होगा ही साथ ही अन्य जिलों के विद्यार्थी जिले में शिक्षा ग्रहण करने आयेंगे। इससे जिले का व्यापार बढ़ेगा। साथ ही रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेगी और स्थानीय लोगो को रोजगार तलाशने अन्य शहरों में पलायन नहीं करना पड़ेगा।
जिले में है चुनिंदा उच्च शिक्षा के विकल्प
धमतरी जिले में पिछले एक दशक में शिक्षा सुविधाओं में विस्तार हुआ है लेकिन विस्तार की गति काफी धीमी है। इसलिए आज भी जिले में चुनिंदा उच्च शिक्षा ही मिल पाती है। इनमें कुछ कृषि महाविद्यालय, कुछ पैरामेडिकल कोर्सेस, शासकीय पीजी कालेज, आईटीआई, पालीटेक्निक कालेज व कुछ कम्प्युटर आधारित कोर्स कराने वाले शिक्षण संस्थाएं ही है। इन संस्थाओं में भी अन्य कई शहरों की तुलना में उच्च स्तर की सुविधायें व शिक्षा का माहौल नहीं है। इसलिए इन कोर्सो को करने के लिए भी छात्र-छात्रायें दूसरे शहरो में जाते है। विडम्बना है कि शिक्षा का क्षेत्र इतना व्यापक होने के बाद भी जिला एजुकेशन हब बनना तो दूर की बात, शिक्षा सुविधायें का विस्तार भी संभव नहीं हो पा रहा है।
प्रशासनिक, राजनीतिक उपेक्षा, उदासीनता का दंश झेल रहे जिलेवासी
उल्लेखनीय है कि 6 जुलाई 1998 को धमतरी, रायपुर से अलग होकर जिला बना। जिला बनने के 27 सालों बाद भी शिक्षा के क्षेत्र में धमतरी जिला पिछड़ा हुआ है। छात्र-छात्राओं को उच्च शिक्षा के लिए दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। इसका बड़ा कारण प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता को माना जा रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों द्वारा अब तक सिर्फ सड़क, पानी बिजली, कृषि जैसी बुनियादी सुविधाओं तक ही सीमित रह गये। दूरदशिर्ता की कमी भी कहा जा सकता है कि जिले में शिक्षा अवसरों को बढ़ावा नहीं दिया जा सका।

