जब से धान खरीदी शुरु हुई है तब से अव्यवस्था हावी है, अन्नदाताओं के साथ प्रशासन कर रही है अपराधियों जैसा व्यवहार
पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, पूर्व महापौर विजय देवांगन व पूर्व दुग्ध महासंघ अध्यक्ष विपिन साहू ने धान खरीदी में अव्यवस्था व मनरेगा कानून में बदलाव का किया विरोध

धमतरी। प्रदेश में धान खरीदी में अव्यवस्था व अनियमितता के साथ मनरेगा कानून में भाजपा सरकार द्वारा किये जा रहे बदलाव को लेकर कांग्रेस मुखर व आक्रमक है। इसी मुद्दे पर पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, पूर्व महापौर विजय देवांगन व पूर्व दुग्ध महासंघ अध्यक्ष विपिन साहू ने भाजपा सरकार पर प्रहार करते हुए कहा कि कवर्धा और महासमुंद जिले में करोड़ों रुपए का धान चूहों ने खाया है. ऐसा बताया जा रहा है, लेकिन इसमें प्रदेश के कुछ बड़े चूहो का हाथ है। घोटाला छिपाने के लिए चूहों को बदनाम किया जा रहा है. जब से बीजेपी की ट्रिपल इंजन की सरकार बनी है तब से भ्रष्ट्राचार अपने चरम पर है. तत्काल एफआईआर दर्ज करने और दोषियों पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। प्रदेश में धान खरीदी जब से शुरु हुई है तब से अव्यवस्था हावी है। अन्नदाताओं के साथ अपराधियों जैसा व्यवहार प्रशासन कर रही है। जबरदस्ती धान समर्पण कराया जा रहा है। सरकार किसी न किसी तरीके से धान खरीदने से बचने का प्रयास कर रही है। आज तक किसान टोकन कटाने व धान बेचने परेशान होते रहे है। अभी भी हजारों किसान धान बेचने से वंचित है। ऐसे में धान खरीदी की सीमा 15 फरवरी तक बढ़ाई जानी चाहिए।
पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, पूर्व महापौर विजय देवांगन व पूर्व दुग्ध महासंघ अध्यक्ष विपिन साहू ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है.मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदशों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजग़ार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के काम उपलब्ध कराती थी। लेकिन मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे बदलाव के बाद अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी, काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। अब तक, मनरेगा संविधान के आर्टिकल 21 से मिलने वाली अधिकारों पर आधारित गारंटी थी। अब इसे चलाना नहीं चलाना सरकार की मर्जी पर निर्भर होगा। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।

