यह राहत का नहीं, बल्कि सुधार का बजट है -सीए सुधीर ठाकुर

यूनियन बजट 2026-27 में डायरेक्ट टैक्सस के क्षेत्र में सरकार ने तात्कालिक कर-राहत देने के बजाय कर-प्रणाली को दीर्घकालिक, सरल और पारदर्शी बनाने पर विशेष ज़ोर दिया है। यह बजट लोकप्रिय घोषणाओं से हटकर स्ट्रक्चरल रेफॉर्म्स पर आधारित दिखाई देता है।इस बजट में आयकर स्लैब एवं दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे मध्यम वर्ग एवं सैलरिड टैक्स पेयर्स को सीधी राहत तो नहीं मिली, परंतु कर-प्रणाली में स्थिरता बनी रही। सरकार का स्पष्ट संकेत है कि वर्तमान में प्राथमिकता दरों में छूट नहीं, बल्कि व्यवस्था को सुदृढ़ करने की है।बजट का सबसे महत्वपूर्ण और दूरगामी निर्णय है इनकम टैक्स एक्ट, 2025 को 1 अप्रैल 2026 से लागू करना। लगभग 60 वर्ष पुरानी इन्कमटैक्स एक्ट, 1961 के स्थान पर एक सरल, मॉडर्न और लिटीगेशन फ्रेंडली कानून लाया जा रहा है।यद्यपि प्रारंभिक वर्षों में प्रोफेशनल्स एवं टैक्स पेयर्स को नई प्रोविशयंस समझने में कुछ कठिनाइयाँ आ सकती हैं, परंतु लॉन्गटर्म में यह रिफार्म टैक्स कम्प्लीयंस को सरल और पारदर्शी बनाएगा।रिवाइज्ड रिटर्न्स दाखिल करने की समय-सीमा को 31 दिसंबर से बढ़ाकर 31 मार्च कर दिया गया है (पेनल्टी के साथ)। इससे वास्तविक टैक्स पेयर्स को त्रुटियाँ सुधारने का अतिरिक्त अवसर मिलेगा और वालंटिरी कम्प्लीयंस को प्रोत्साहन मिलेगा।
ओवरसीज एजुकेशन एवं मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए टी सी एस दर को 5 प्रतिशत से घटाकर 2 प्रतिशत करना मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए बड़ी राहत है। वहीं दूसरी ओर, एन आर आई प्रॉपर्टी ट्रांसक्शयंस पर बायर लेवल टीडीएस की व्यवस्था कर सरकार ने ट्रांसपेरेंसी एवं रेवेन्यू प्रोटेक्शन को मजबूत किया है।शेयर बे बैक को कैपिटल गैंस के रूप में टैक्सबल करना तथा डिरीवाटिव्स पर एस टी टी बढ़ाना यह दर्शाता है कि सरकार स्पेकुलेटिव एक्टिविटीज पर नियंत्रण और रेवेन्यू औग्मेटेशन की नीति अपना रही है। इससे शार्ट टर्म मार्किट लिक्विडिटी पर कुछ असर पड़ सकता है.मेट रेट को 15 प्रतिशत से घटाकर 14 प्रतिशत करना और इसे फाइनल टैक्स की दिशा में ले जाना कॉर्पोरेट सेक्टर के लिए सकारात्मक संकेत है। इससे टैक्स सर्टिइंटी बढ़ेगी और ईजी ऑफ़ डूइंग बिज़नेस को मजबूती मिलेगी।
गिफ्ट सिटी में टैक्स हॉलिडे की अवधि को 10 वर्षों से बढ़ाकर 20 वर्ष करना भारत को एक वैश्विक वित्तीय केंद्र (ग्लोबल फाइनेंसियल हब) के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
कुल मिला कर निष्कर्ष यह है कि
यूनियन बजट 2026-27 को यदि एक पंक्ति में परिभाषित किया जाए, तो यह कहा जा सकता है कि यह रिलीफ बजट नहीं, बल्कि रिफार्म बजट है।सरकार ने अल्पकालिक राहत के बजाय कर-प्रणाली को मजबूत नींव देने पर ध्यान केंद्रित किया है। संभव है कि इसका प्रत्यक्ष लाभ आज न दिखे, परंतु आने वाले वर्षों में यह सुधार भारत की टैक्स व्यवस्था को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी और प्रभावी बनाएगा।