Uncategorized

आम जनता के लिए निराशाजनक है केन्द्रीय बजट, आम परिवारों को नहीं मिली राहत – पंकज महावर

प्रदेश कांग्रेस सं. सचिव ने कहा मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है

हजारों किसाननहीं बेच पाये है अपनी उपज, सरकार को पंजीकृत सभी किसानों का खरीदना चाहिए धान

धमतरी । प्रदेश कांग्रेस सं. सचिव पंकज महावर ने कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है.मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदशों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। मनरेगा में पहले हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, पूरे साल काम की मांग कर सकते थे, कानूनी न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी दी गई थी, ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था, काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी, मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के काम उपलब्ध कराती थी। लेकिन मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे बदलाव के बाद अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी, काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।
प्रदेश कांग्रेस सं. सचिव पंकज महावर ने कहा कि बजट में किसानों की आय दोगुनी करने की बात एक बार फिर केवल कागजों तक सीमित रह गई है। खाद, बीज, डीजल और बिजली की बढ़ती कीमतों पर कोई ठोस घोषणा नहीं की गई। युवाओं के लिए रोजगार सृजन को लेकर बजट पूरी तरह मौन है। बेरोजगारी लगातार बढ़ रही है, लेकिन नए रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए कोई ठोस योजना सामने नहीं आई। शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे बुनियादी क्षेत्रों के बजट में भी अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं की गई, जिससे आम जनता को निराशा हाथ लगी है। महंगाई से त्रस्त आम परिवारों के लिए इस बजट में कोई राहत नहीं है। रसोई गैस, पेट्रोल-डीजल और दैनिक उपयोग की वस्तुएं लगातार महंगी हो रही हैं, लेकिन सरकार ने इन पर कोई नियंत्रण नहीं किया। यह बजट जनहित के बजाय केवल चुनावी और दिखावटी घोषणाओं तक सीमित है।
श्री महावर ने आगे कहा कि धान खरीदी के दौरान किसान परेशान रहे। अभी भी हजारों किसान अपनी उपज नहीं बेच पाये है। और साय सरकार द्वारा खरीदी बंद कर दी गई है। ऐसे में राज्य सरकार को पंजीकृत सभी किसानों का धान खरीदना चाहिए।

Related Articles

Back to top button
error: Content is protected !!