प्रस्तावित फूड पार्क के विरोध में ग्रामीण, स्थानीय जनप्रतिनिधियों को विश्वास में नहीं लेने का आरोप
जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर और क्षेत्र के जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर ने प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक पर लगाये मनमानी के आरोप

कुरुद। लगभग 27 एकड़ भूमि भालूझूलन और डांडेसरा बायपास मार्ग क्षेत्र में 39 उद्योग स्थापित करने की योजना को लेकर ग्रामीणों में तीव्र आक्रोश है। आरोप है कि ग्रामसभा की स्पष्ट सहमति और पंचायत को समुचित जानकारी दिए बिना जमीन चिन्हित की गई और भूमिपूजन की औपचारिकता पूरी कर दी गई। विवाद ने नया मोड़ तब लिया जब भूमिपूजन कार्यक्रम में क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर को आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने इसे न केवल व्यक्तिगत अपमान बल्कि क्षेत्र की जनता के जनादेश की अनदेखी करार दिया। उनका कहना है, जब जनता ने हमें चुना है तो उनकी जमीन और अधिकार से जुड़े फैसलों में हमें दरकिनार करना लोकतांत्रिक व्यवस्था पर प्रश्नचिह्न है। यह भेदभाव है। ग्रामीणों का स्पष्ट कहना है कि वे उद्योग और रोजगार के विरोधी नहीं हैं। उनका विरोध उस तरीके से है, जिसमें निर्णय लिए जा रहे हैं। पंचायत के पंच और सरपंच तक यह कह रहे हैं कि प्रस्ताव की विधिवत जानकारी उन्हें नहीं दी गई। सवाल उठ रहा है कि यदि पंचायत स्तर पर पारदर्शिता नहीं रही, तो स्वीकृति प्रक्रिया कैसे पूरी हुई ग्रामीणों की चिंता का बड़ा कारण यह भी है कि प्रस्तावित क्षेत्र में चारागाह, खेल मैदान, तालाब और मुक्तिधाम जैसी सार्वजनिक उपयोग की जमीनें शामिल बताई जा रही हैं। यदि यह जमीन चली गई, तो पशुओं की निस्तारी, बच्चों के खेल और सामाजिक-धार्मिक गतिविधियों के लिए गांव के पास कोई वैकल्पिक स्थान नहीं बचेगा। गांव में विरोध अब खुलकर सड़कों पर दिखाई दिया। महिला और पुरुष ग्रामीणों ने एकजुट होकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की और अपनी मांगों को पुरजोर तरीके से उठाया। इस पर ग्रामीणों और क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर ने मांग रखी कि प्रस्तावित बैठक में सक्षम अधिकारी अथवा कलेक्टर स्वयं उपस्थित रहें। जिला कांग्रेस अध्यक्ष तारिणी चंद्राकर और क्षेत्र की जिला पंचायत सदस्य नीलम चंद्राकर ने ग्रामीणों के साथ खड़े होकर प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक पर मनमानी का आरोप लगाया।