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बोर्ड परीक्षाओं के बीच होली का त्यौहार, नगाड़ों की डिमांड कम

4 मार्च को मनेगा होली पर्व, बिक्री हेतु सप्ताह भर पूर्व से बाजार पहुंच चुका है नंगाड़ा

150 रुपये से लेकर 4000 तक के नंगाड़ा है उपलब्ध, विलुप्त हो रही फाग की परम्परा

धमतरी। हिन्दू सनातन धर्म में होली पर्व का विशेष महत्व है। पर्व के कई दिनों पहले से ही पर्व की खुमारी शुरु हो जारी है। होली पर्व पर नंगाड़ो की थाप कई दिन पहले से ही सुनाई देती है। लेकिन इस बार यह थाप कम हो सकती है। क्योंकि होली पर्व के बीच 10वीं, 12वीं की बोर्ड परीक्षाएं भी जारी है। साथ ही 9वीं, 11वीं की परीक्षाएं भी 25 फरवरी से शुरु हो चुकी है। वहीं व्यापम द्वारा द्वारा भी अप्रैल माह में परिवहन आरक्षक, मंडी उपनिरीक्षक के पश्चात पीएससी मेन्स की भी परीक्षा ली जाएगी। जिसकी तैयारी में भी छात्र-छात्राएं जुटे हुए है। ऐसे में नंगाड़ो की बिक्री व थाप कम है।
बता दे कि 2-3 मार्च को होलिका दहन होगा धमतरी शहर सहित जिले में अनेक स्थानों पर होलिका दहन हर वर्ष की भांति किया जायेगा। पर्व मे बसंत पंचमी के दिन परम्परा अनुसार अरण्डी का पेड़ लगाकर होलिका दहन की तैयारियां शुरु कर दी गई है। होलिका दहन की अगली सुबह 4 मार्च को होली का पर्व मनाया जायेगा। इसके कई दिन पहले से ही बाजार में नंगाड़ो की बिक्री शुरु हो गई है। घड़ी चौक में नंगाड़ा विक्रेताओं ने बताया कि अभी नंगाड़ो की डिमांड कम है। जैसे-जैसे पर्व नजदीक आयेगा। नंगाड़ो की डिमांड बढ़ेगी। बता दे कि बाजार में 150 रुपये से लेकर 4000 तक के नंगाड़ा उपलब्ध होते है। शहर में कई स्थानों पर नंगाड़ा की बिक्री होती है। बाहर से लोग नंगाड़ो की बिक्री करने भी पहुंचते है। चूंकि इस साल 10वीं, 12वीं बोर्ड सहित लोकल क्लास की परीक्षाएं होली पर्व के बीच ही है। इसलिए नंगाड़ो की डिमांड प्रभावित हो सकती है। दरअसल बोर्ड परीक्षाओं के चलते नंगाड़ो से परीक्षार्थियों की बढ़ाई भी प्रभावित होती है। साथ ही प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में भी प्रतिभागी जुटे हुए है।
घटते जा रहा है नंगाड़ो और फाग का क्रेज
कुछ साल पहले होली पर्व पर लगभग 15 दिन पहले से ही नंगाड़ो की थाप सुनाई पड़ती थी। गली गली में बच्चे बड़े शौंक से नंगाड़े बजाते थे। शहर सहित ग्रामीण क्षेत्रो में नंगाड़ा बजाने के लिए कई टोलिया फेमस थी। इसलिए फाग, प्रतियोगिता होती थी। जिसमें नंगाड़ा के कई आकर्षक थाप सुनाई पड़ते थे। लेकिन धीरे-धीरे यह परम्परा घटते जा रही है। नंगाड़ो का क्रेज तो काफी कम हो गया है। होली के एक दो दिन पहले ही नंगाड़ा बजते है। वहीं फाग भी अब काफी कम होते जा रहा है। शहर में तो यह अब अंतिम दौर में है। कुछ ग्रामीण इलाकों में फाग को संजीवनी मिलती रहती है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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