बिहान से मिली नई पहचान, संध्या मानिकपुरी बनीं ‘लखपति दीदी’
सिलाई कार्य से हर माह 10 से 12 हजार रुपए की आय, कई महिलाओं को भी बना रहीं आत्मनिर्भर

धमतरी, 14 मार्च 2026/ धमतरी जिले के वनांचल क्षेत्र सिहावा (नगरी) की निवासी श्रीमती संध्या सुभाष मानिकपुरी आज आत्मनिर्भरता और महिला सशक्तिकरण की मिसाल बन चुकी हैं। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर उन्होंने न केवल अपने जीवन की दिशा बदली, बल्कि गांव की अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनने की प्रेरणा दी है।
जीवन में कई कठिन परिस्थितियों का सामना करने के बावजूद संध्या ने हार नहीं मानी। पति के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। ऐसे समय में उन्होंने राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन “बिहान” से जुड़कर स्वरोजगार के माध्यम से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने का संकल्प लिया।
बारहवीं तक शिक्षित संध्या को सिलाई कार्य में रुचि थी। उन्होंने इस हुनर को आजीविका का माध्यम बनाने का निर्णय लिया। गांव की 10 महिलाओं को साथ लेकर उन्होंने “ओम स्व-सहायता समूह” का गठन किया और समूह की महिलाओं को बिहान योजना की जानकारी देते हुए उन्हें भी आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रेरित किया।
संध्या मानिकपुरी ने न केवल स्वयं सिलाई कार्य शुरू किया, बल्कि समूह की महिलाओं को भी आर्थिक प्रबंधन और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने महिलाओं को वित्तीय साक्षरता के तहत गरीबी के चक्र से बाहर निकलने, भविष्य के लिए वित्तीय लक्ष्य तय करने, समझदारी से खर्च करने तथा आवश्यकताओं और इच्छाओं के बीच अंतर समझने जैसे विषयों पर प्रशिक्षण भी दिया। योजना की अच्छी समझ और सक्रियता के कारण वे एफएलसीआरपी (Financial Literacy Community Resource Person) के रूप में भी अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभा रही हैं।
आज संध्या अपने सिलाई कार्य के माध्यम से ब्लाउज, पेटीकोट, डिजाइनर सूट, शाला गणवेश, बच्चों के कपड़े, शर्ट-पैंट और सलवार-कुर्ती सिलती हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह लगभग 10 हजार से 12 हजार रुपए तक की आय होने लगी है। गांव की अधिकांश महिलाएं अब अपने कपड़े सिलवाने के लिए संध्या के पास ही आती हैं, जिससे उनकी आय में लगातार वृद्धि हो रही है।
संध्या मानिकपुरी को उनके उत्कृष्ट कार्यों के लिए महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत महिला मेट सम्मान भी प्राप्त हो चुका है।
संध्या बताती हैं कि बिहान से जुड़कर उन्हें आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की नई राह मिली। वे कहती हैं कि “अगर इंसान में हिम्मत और संकल्प हो तो कोई भी काम असंभव नहीं होता। बिहान ने मुझे आगे बढ़ने की शक्ति दी और आज मैं अपने साथ-साथ अन्य महिलाओं को भी आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दे रही हूं।”
उन्होंने दिनेश्वरी नेताम, भुनंदा साहू, विद्या शांडिल्य, पुष्पलता घाटे, मोना, लक्ष्मी और दीपा सहित कई महिलाओं को सिलाई का प्रशिक्षण देकर उन्हें भी रोजगार से जोड़ दिया है। संध्या मानिकपुरी का मानना है कि दूसरों को आगे बढ़ाने में ही असली संतोष और खुशी है।
आज संध्या मानिकपुरी की कहानी यह साबित करती है कि यदि सही मार्गदर्शन, सरकारी योजनाओं का सहयोग और मजबूत संकल्प हो, तो हर महिला आत्मनिर्भर बन सकती है। बिहान योजना के माध्यम से संध्या जैसी अनेक महिलाएं आज अपने सपनों को साकार कर रही हैं और समाज के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

