शहर सहित जिले में जल संकट : गिरा वाटर लेवल, सूखे बोर व हैण्डपंप
शासकीय नल कनेक्शन की धार हुई पतली, डिमांड ज्यादा, पानी की सप्लाई कम इसलिए परेशान हो रहे लोग
साल दर साल गिरता जल स्तर बना चिंता का कारण, अभी नहीं हुए जल संरक्षण के सार्थक प्रयास तो भविष्य होगा सूखा

धमतरी। वर्तमान में भीषण गर्मी पड़ रही है। पारा 44 डिग्री को छू रहा है। लोग गर्मी से बेहाल हो रहे है। ऐसे गर्मी में पानी की डिमांड कई गुणा बढ़ गई है। लेकिन पानी की सप्लाई पहले से कम हो गई है। नतीजन लोगों को जल संकट से जूझना पड़ रहा है।
बता दे कि धमतरी में 69 फीट से ज्यादा जल स्तर गिर चुका है। जिसके चलते बोर, कुएं, हैण्डपंप सूख चुके है। इसलिए लोगों की समस्या काफी बढ़ गई है। ऐसे परिवार जो सरकारी पानी पर निर्भर है। उनको भी पानी की किल्लत का सामना करना पड़ रहा है। शहर में नगर निगम द्वारा वार्डो में बोर कराकर पाईप लाईन के माध्यम से घरों तक पानी पहुंचाया जाता है, लेकिन कई बोर में वाटर लेवल नीचे चले जाने के कारण पानी नहीं आने या कम आने की समस्या बनी हुई है। जिसके कारण घरों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा है। चूंकि पानी पहले से कम मिल रहा है और गर्मी में आवश्यकता ज्यादा है। यह जल संकट का कारण बना हुआ है। ग्रामीण क्षेत्रो में भी स्थिति खराब है। सैकड़ो हैण्डपंप बंद हो चुके है। अब वाटर लेवल बारिश के मौसम में उपर आने के बाद ही यह बंद पड़े हैण्डपंप पुन: शुरु हो पायेगा। ग्रामीण क्षेत्रो में भी सुबह से पानी के लिए जद्दोजहद करना पड़ रहा है। कई गांवो में तो पूरा दिन परिवार के कुछ सदस्यों का समय पानी की व्यवस्था में ही निकल जाता है।
अंधाधुन दोहन, क्रांक्रीटीकरण, वनो की कटाई से बढ़ी समस्या
लगातार हर वर्ष गर्मी के मौसम में जल संकट उत्पन्न होता है। यह साल दर साल बढ़ते जा रहा है। हर वर्ष जल संरक्षण के ठोस उपाय के दावें किये जाते है। लेकिन जमीनी स्तर पर काम होता नहीं है। इसलिए समस्या घटने के बजाय बढ़ती जा रही है। विशेषज्ञो की माने तो जिनके पास पानी की पर्याप्त उपलब्धता है उनके द्वारा पानी का अंधाधुन दोहन किया जाता है। वहीं जिनके पास किल्लत है वे बूंद-बूंद के लिए तरसते है। अंधाधुन दोहन, शहरी व क्रांक्रीटीकरण, वनों की लगातार कटाई, प्रशासनिक व्यवस्था में कमी आदि के कारण साल दर साल भू जल स्तर नीचे जाता जा रहा है।