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मध्यप्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज का जोड़ा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में बना रही घोसला

यूएसटीआर में पहले भी मिल चुके है उडऩ गिलहरी, बड़ी गिलहरी, सुनहरा कछुआ, मालाबार पीड हार्नबिल जैसे कई दुर्लभ वन्य जीव


धमतरी। मध्यप्रदेश के राजकीय पक्षी दूधराज (इंडियन पैराडाइज़ फ्लाईकैचर) के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के विभिन्न वन क्षेत्रों में लगातार दर्शन हो रहे है। वर्तमान में यह जोड़ा घोसले का निर्माण कर रही है। यूएसटीआर में पहले भी उडऩ गिलहरी, बड़ी गिलहरी, सुनहरा कछुआ, मालाबार पीड हार्नबिल जैसे कई दुर्लभ वन्य जीव मिल चुके है। यह रिजर्व क्षेत्र की समृद्ध जैव विविधता एवं स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का एक सकारात्मक संकेत है। अपनी अद्भुत सुंदरता, लंबी पूँछ और आकर्षक उड़ान के लिए प्रसिद्ध यह पक्षी अब रिजर्व के वनों, नदी तटीय क्षेत्रों एवं वृक्षाच्छादित आवासों में नियमित रूप से देखा जा रहा है।
दूधराज भारत के सबसे सुंदर पक्षियों में से एक माना जाता है। वयस्क नर पक्षी अपने चमकदार सफेद शरीर और अत्यंत लंबी रेशमी पूँछ के कारण आसानी से पहचाना जाता है, जबकि मादा एवं युवा पक्षियों का रंग लाल-भूरा (रुफस) होता है। इसकी मनमोहक उड़ान और मधुर स्वर प्रकृति प्रेमियों एवं पक्षी पर्यवेक्षकों को विशेष रूप से आकर्षित करते हैं।
उदंती-सीतानदी में आवास
दूधराज मुख्यत: नम पर्णपाती वनों, मिश्रित वनों, बाँस क्षेत्रों, नदी-नालों के किनारे स्थित हरित पट्टियों तथा घने वृक्षावरण वाले क्षेत्रों में निवास करता है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में उपलब्ध विविध वन आवास इस पक्षी के भोजन, प्रजनन एवं घोंसला निर्माण के लिए आदर्श परिस्थितियाँ प्रदान करते हैं। जलस्रोतों, वन मार्गों, वन ग्रामों के आसपास तथा घने वृक्षों वाले क्षेत्रों में देखा जाता है। इसकी नियमित उपस्थिति इस बात का प्रमाण है कि रिजर्व के वन क्षेत्र अभी भी उच्च गुणवत्ता वाले प्राकृतिक आवास उपलब्ध करा रहे हैं।
कीट आबादी के नियंत्रण में निभाते है महत्वपूर्ण भूमिका
दूधराज एक महत्वपूर्ण कीटभक्षी पक्षी है। यह मुख्य रूप से मक्खियों, पतंगों, भृंगों, दीमकों तथा अन्य उडऩे वाले कीटों का भोजन करता है। इस प्रकार यह प्राकृतिक रूप से कीटों की संख्या को नियंत्रित कर वन पारिस्थितिकी तंत्र में संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। कीट आबादी के नियंत्रण से वनस्पतियों को लाभ मिलता है तथा संभावित कीट प्रकोप की संभावना कम होती है। इसके अतिरिक्त, यह पक्षी स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का एक जैव-संकेतक भी माना जाता है। किसी क्षेत्र में दूधराज की उपस्थिति उस क्षेत्र के पर्यावरणीय स्वास्थ्य और वन गुणवत्ता को दर्शाती है।
रोचक व्यवहार
दूधराज अपनी अद्भुत शिकार शैली के लिए प्रसिद्ध है। यह किसी शाखा पर शांत बैठकर आसपास की गतिविधियों पर नजर रखता है और जैसे ही कोई उड़ता हुआ कीट दिखाई देता है, तुरंत हवा में उड़ान भरकर उसे पकड़ लेता है। शिकार करने के बाद यह पुन: उसी शाखा पर लौट आता है। प्रजनन काल के दौरान नर एवं मादा दोनों मिलकर घोंसला बनाते हैं तथा बच्चों की देखभाल करते हैं। इनका घोंसला घास, वृक्षों की छाल के रेशों, मकड़ी के जालों एवं अन्य प्राकृतिक सामग्रियों से बना एक सुंदर कपनुमा ढाँचा होता है, जिसे पतली शाखाओं पर बनाया जाता है। लंबी पूँछ वाले नर पक्षी प्रजनन काल में आकर्षक हवाई प्रदर्शन करते हैं, जो इनके प्रणय व्यवहार का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।
संरक्षण का महत्व
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दूधराज के लगातार बढ़ते अवलोकन यह दर्शाते हैं कि वन संरक्षण, नदी तटीय आवासों की सुरक्षा तथा क्षतिग्रस्त वनों के पुनस्र्थापन के प्रयास सकारात्मक परिणाम दे रहे हैं। स्वस्थ एवं संरक्षित वन क्षेत्र न केवल बाघ, तेंदुआ एवं अन्य बड़े वन्यजीवों के लिए महत्वपूर्ण हैं, बल्कि पक्षियों, कीटों और छोटे जीवों के संरक्षण में भी समान रूप से योगदान देते हैं। दूधराज की नियमित उपस्थिति यह प्रमाणित करती है कि उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व मध्य भारत के महत्वपूर्ण जैव विविधता केंद्रों में से एक के रूप में उभर रहा है।

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