विकास के नाम पर पेड़ो का विनाश
सिहावा चौक से कोलियारी, रत्नाबांधा चौक से मुजगहन तक 9.4 किमी का होगा फोरलेन निर्माण, कटेंगे 13 सौ से अधिक पेड़
सालों से जिस पेड़ की छांव ठंडी हवा लेते रहे उसे आंखो के सामने कटते देख उदास हो रहे लोग

धमतरी। आज विश्व पर्यावरण दिवस है। एक ओर जहां दुनिया भर में लोग पर्यावरण संरक्षण व पेड़ो के बचाव की शपथ व संकल्प ले रहे है वहीं दूसरी ओर धमतरी में सैकड़ो पेड़ो पर कुल्हाड़ी चल रही है। आज का दौर आधुनिकता का दौर है। यहां विकास को पर्यावरण से ज्यादा तवज्जों दिया जाता है। विकास के नाम पर पेड़ो का विनाश भी हो रहा है। ऐसी ही स्थिति इन दिनों धमतरी में है जहां विकास के शोर में सालों पुरानी वृझो की बर्बादी का दर्द सुनाई नहीं दे रहा है।
बता दे कि धमतरी शहर के भीतर दो फोरलेन का निर्माण होना है। शासन से स्वीकृति मिल चुकी है। नेताओं, अधिकारियों द्वारा भूमिपूजन किया जा चुका है, लेकिन इससे पूर्व ही चौड़ी सड़क बनाने पेड़ो की कटाई हो रही है। धमतरी शहर में रत्नाबांधा चौक से लेकर मुजगहन तक 4.4 किमी लंबी फोरलेन सड़क का निर्माण 44 करोड़ की लागत से होगा। वहीं सिहावा चौक से कोलियारी तक 5 किमी लंबी फोरलेन सड़क की लागत 59 करोड़ होगी। इन सड़कों का चौड़ीकरण भी आवश्यक है, लेकिन चौड़ीकरण व बेहतर यातायात की सुविधा के नाम पर पेड़ो की बलि चढ़ाना लोगो को रास नहीं आ रहा है। बता दे कि 9.4 किमी लंबी फोरलेन सड़क हेतु 13 सौ से अधिक पेड़ चिन्हाकित किये गये है जो कि काटे जायेंगे। पेड़ो की कटाई कई दिनों पहले से हो रही है। अब तक कई पेड़ काटे जा चुके है। और कई काटे जायेंगे। उक्त मार्ग पर सालों से व्यापार करने वाले कामगार व निवासियों में पेड़ो की कटाई को लेकर उदासी छाई हुई है। उनके अनुसार वे सालों से इन पेड़ो की छांव और ठंडी हवाओं के साये में रहे है। अब जब यह पेड़ धराशायी किये जा रहे है तो उन्हें आत्मीय पीड़ा हो रही है। उन्हें यह अहसास हो रहा है कि अब भविष्य में कभी उन्हें इन पेड़ो का आश्रय नहीं मिल पायेगा। पेड़ो पर चलते कुल्हाड़ी का वार उनके मन को चोटिल कर रहा है। लेकिन वे विकास की आवश्यकताओं को भी समझ रहे है। इसलिए चाहकर भी पेड़ो की कटाई नहीं रोक पा रहे है।
10 गुणा लगाये जायेंगेे पौधे
पेड़ो की कटाई के संबंध में शहरवासी अमित ठाकुर, विकास साहू ने कहा कि बड़ी मात्रा में पेड़ो की कटाई सड़क निर्माण के नाम पर हो रही है। जबकि शासन प्रशासन की प्राथमिकता होनी चाहिए कि कम से कम पेड़ काटे जाये। और यदि विकास के लिये पेड़ काटने आवश्यक ही हो तो जितने पेड़ काटे जा रहे है। उनके संख्या के 10 गुणा अधिक पौधे लगाये जाये साथ ही इन पौधो को लगाकर लावारिश हालत में न छोड़ा जाये जब तक पौधे बड़े होने लायक न हो जाये उनकी देखरेख व पशुओं आदि से सुरक्षा भी सुनिश्चित हो। इस संबंध धमतरी डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि लगभग 13 सौ पेड़ काटे जाएंगे। और नियमानुसार काटे जाने वाले पेड़ो की संख्या से 10 गुणा अधिक पौधे लगाएंगे। जिनके लिए जगह के चिन्हाकंन की प्रक्रिया जारी है।
ट्रांस प्लांटेशन पद्धति का प्रयोगकर पेड़ो को काटने के बजाये स्थानातंरित करे
स्थानीय निवासी अंकित सिन्हा, विनय देवांगन ने कहा कि पेड़ो की कटाई हमारी व आने वाली पीढिय़ों के लिये घातक है। इसलिए ऐसी व्यवस्था होनी चाहिए कि पेड़ो को काटा न जाये बल्कि जिस प्रकार विदेशो में पेड़ो को काटने के बजाय ट्रांस प्लांटेशन पद्धति का उपयोग कर पेड़ो को एक से दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है। यहां भी ऐसा होना चाहिए। पेड़ो की कटाई आज के बदलते पर्यावरणीय परिवेश में स्वयं के नुकसान के समान है।
पेड़ो के कटाई के है अनेक नुकसान
लगातार हो रही पेड़ों की अंधाधुंध कटाई पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा बनती जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि जंगलों और हरित क्षेत्रों में कमी आने से जलवायु परिवर्तन की समस्या तेजी से बढ़ रही है, जिसका सीधा असर मानव जीवन, वन्य जीवों और प्राकृतिक संसाधनों पर पड़ रहा है। पेड़ों की कटाई के कारण वातावरण में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ रही है, जिससे ग्लोबल वार्मिंग और तापमान में वृद्धि हो रही है। इसके साथ ही वर्षा चक्र प्रभावित हो रहा है, जिससे सूखा और बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं की संभावना बढ़ जाती है। पर्यावरणविदों के अनुसार पेड़ मिट्टी को बांधकर रखने का कार्य करते हैं। उनकी कटाई से मिट्टी का कटाव बढ़ता है और कृषि भूमि की उर्वरता प्रभावित होती है। वहीं वन्य जीवों का प्राकृतिक आवास नष्ट होने से जैव विविधता पर भी खतरा मंडरा रहा है। पेड़ों की संख्या घटने से वायु प्रदूषण बढ़ता है क्योंकि पेड़ वातावरण से कार्बन डाइऑक्साइड को अवशोषित कर ऑक्सीजन प्रदान करते हैं। इसके अलावा भूजल स्तर में गिरावट, गर्मी में वृद्धि तथा मानव स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में भी बढ़ोतरी देखी जा रही है।
दो पेड़ पीपल व बरगद का होगा ट्रांस प्लांटेशन
डीएफओ श्रीकृष्ण जाधव ने बताया कि ट्रांस प्लांटेशन प्रक्रिया के तहत पेड़ो के जीवित रहने की संभावना काफी कम रहती है। पीपल व बरगद ऐसे पेड़ है जो विपरीत हालात में भी संघर्षशील होते है शहर में बनने वाले दो फोरलेन सड़क के तहत कटने वाले में दो पेड़ो पीपल व बरगद का ट्रांस प्लांटेशन अन्य जगहो पर किया जायेगा। इसके लिए देशी प्रक्रिया अपनाई जाएगी क्योकि ट्रांस प्लांटेशन के लिए उपयोग में आने वाली मशीन छत्तीसगढ़ में नही ंहै।

