ईश्वर को प्रेम सबसे प्रिय है, प्रभु ने इस संसार को प्रेम की डोरी से तो बांध रखा है-संत लोकेश
सद्गुरु स्वामी टेऊँराम नगर में स्थित प्रेम प्रकाश आश्रम में जारी है चालीहा महोत्सव

धमतरी के सद्गुरु स्वामी टेऊँराम नगर में स्थित प्रेम प्रकाश आश्रम में जारी चालीहा महोत्सव के चतुर्थ दिवस के चालीसा पाठ व सत्संग का आयोजन लखवानी परिवार के गिरधारीलाल सुनीलकुमार अनिलकुमार एवं विजयकुमार चारों भाइयों द्वारा कराया गया.आज सत्संग मुख्य बिंदु प्रभु-प्रेम से भरे दोहों एवं भजनों से परिपूर्ण एवं प्रभु से प्रेम करने की प्रेरणा से लबालब रहा, प्रेम के बिना कोई भी जीव हरि के धाम नहीं पहुँच सकता हरि से प्रेम ही प्रधान है, प्रेम की इसी महिमा पर वर्णन करने हेतु आचार्य श्री द्वारा राग कोह्यारी में रचित भजन को संत लोकेश ने सुनाया.
संत जी ने बताया कि ईश्वर को प्रेम सबसे प्रिय है प्रभु ने इस संसार को प्रेम की डोरी से तो बांध रखा है साथ ही अपने को भी भक्त के अटल प्रेम की डोरी से बंधने को विवश कर दिया है इसीलिए भक्तों के अटल प्रेम के आगे प्रभु परमात्मा स्वयं अपने नियम भी बदल देते हैं.अटल प्रेम के पाले पड़कर प्रभु को नियम बदलते देखा अपना मान टले टल जाये भक्त का मान न टलते देखा.इसका सबसे का सबसे बड़ा प्रमाण है कृष्ण भगवान के द्वारा महाभारत के युद्ध के दौरान भीष्म पितामह की प्रतिज्ञा के पालन के कारण अपने द्वारा युद्ध में हथियार न उठाने के वायदे को रथ के चक्के को उठाकर तोड़ दिया रथ का पहिया जो ईश्वर की ऊँगली में चलयमान चक्र का पर्याय है जो उनका अचूक हथियार है उसको अपनी ऊँगली में उठा कर भीष्म की प्रतिज्ञा पूर्ण की ऐसा करके प्रभु ने अपने भक्त के अटल प्रेम के वशीभूत हो भक्त के मान को रखा एवं अपने मान का त्याग किया ऐसे अनेक दृष्टांटों से इतिहास भरा पड़ा है इसीलिये शबरी विदुर एवं पीपे जैसे हरि भगतों की भांति श्री हरि से सच्चा प्रेम करें.
