वैध बकाया मांगना अपराध नहीं, कानून के दायरे में रहकर अपने अधिकारों की रक्षा करें व्यापारी-राजा रोहरा
कहा न्याय व्यवस्था में बढ़ा विश्वास, व्यापारियों को मिला नया आत्मविश्वास

धमतरी- राजा रोहरा प्रदेश उपाध्यक्ष छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज,संस्थापक एवं सचिव धमतरी चेम्बर ऑफ कॉमर्स ने कहा हाल ही में माननीय उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए एक महत्वपूर्ण निर्णय ने देशभर के व्यापारी समाज में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और आत्मविश्वास को और मजबूत किया है। न्यायालय ने स्पष्ट संकेत दिया है कि किसी व्यापारी द्वारा अपने वैध बकाया धन की मांग करना अपने आप में कोई अपराध नहीं माना जा सकता।
यह निर्णय केवल एक व्यक्ति की कानूनी जीत नहीं है, बल्कि उन लाखों ईमानदार व्यापारियों की भावना का सम्मान है जो वर्षों से अपने परिश्रम, पूंजी और विश्वास के आधार पर व्यापार करते हैं तथा समय पर भुगतान प्राप्त करने की अपेक्षा रखते हैं।
व्यापारी किसी का शत्रु नहीं होता। वह समाज की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है, रोजगार देता है, करों का भुगतान करता है और देश की अर्थव्यवस्था को गति प्रदान करता है। ऐसे में अपने ही परिश्रम से अर्जित धन की मांग करना उसका अधिकार भी है और व्यापारिक व्यवस्था की आवश्यकता भी।
धमतरी चेम्बर ऑफ कॉमर्स इस महत्वपूर्ण निर्णय का स्वागत करते हुए अशोक वाधवानी एवं उनके परिवार को हार्दिक बधाई प्रेषित करता है। यह निर्णय न्यायपालिका की निष्पक्षता और कानून की सर्वोच्चता में विश्वास को और सुदृढ़ करता है।साथ ही यह निर्णय व्यापारियों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश भी देता है कि अधिकारों के साथ जिम्मेदारियां भी जुड़ी होती हैं।
चेम्बर सभी व्यापारियों से आग्रह करता है कि प्रत्येक लेन-देन का लिखित रिकॉर्ड रखें। बिल, रसीद, भुगतान प्रमाण एवं अन्य दस्तावेज सुरक्षित रखें। उधारी देते समय उचित दस्तावेजी प्रक्रिया अपनाएं। बकाया राशि की मांग हमेशा शालीन, कानूनी और सभ्य तरीके से करें। किसी भी प्रकार की धमकी, दबाव या अनुचित व्यवहार से बचें।कानून का सम्मान करते हुए अपने अधिकारों की रक्षा करें।यह निर्णय देश के प्रत्येक व्यापारी को यह संदेश देता है कि ईमानदारी से व्यापार करें, कानून का पालन करें, अपने दस्तावेज व्यवस्थित रखें और अपने वैध अधिकारों के लिए निडर होकर खड़े रहें।न्याय व्यवस्था पर विश्वास रखें, क्योंकि कानून का उद्देश्य ईमानदार नागरिकों और व्यापारियों की सुरक्षा करना है, उन्हें भयभीत करना नहीं।
