प्रेम प्रकाश आश्रम में जारी चालीहा महोत्सव के 17 वें दिन हुआ शब्द अंताक्षरी का आयोजन

प्रेम प्रकाश आश्रम में जारी चालीहा महोत्सव के 17 वें दिन शब्द अंताक्षरी का आयोजन हुआ जिसमें भक्तों को एक कोई भी शब्द संत जी दे रहे थे भक्तों को भजन गा कर सुनाना था जिस भजन में वह शब्द शामिल हो इसका भक्तों ने अपार आनन्द लिया बच्चों ने भी भजन गाकर चालीहा महापर्व में भाग लेने से पनपे संस्कारों से अवगत कराया. संत जी ने भी गुरु शरण शब्द पर उक्त भजन का गायन किया इस भजन में गुरुवर ने गुरु की शरण लेने से एवं प्रार्थना करने से क्या क्या सम्भव हो जाता है.
बताया है कि गुरु ही भगवान है एवं भगवान ही गुरु है गुरु एवं भगवान में भेद नहीं है दोनों एक ही हैं. अर्जुन ने भगवान श्री कृष्ण को गुरु माना है.आचार्य प्रवर सद्गुरु स्वामी टेऊँराम जी महाराज ने अपने गुरु दादा आसुराम जी महाराज की शरण ली एवं उन्हें ही हरि का रूप मान अपने गुरुदेव में अनुरक्ति की एवं महान भक्ति की,यही वजह है कि आज आचार्य प्रवर पूरे विश्व में व्यापक हैं. ऐसे समर्थ एवं ब्रह्मस्वरुप गुरुदेव की हमको शरण ले प्रार्थना करनी है.