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नया अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को कमजोर करेगा इससे लाखों मजदूरों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा-नींशु चंद्राकर

पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष ने कहा विकसित भारत जी राम जी अधिनियम' से मजदूरों को होगा नुकसान,गरीबों के अधिकारों पर यह प्रहार हैँ

  1. नया अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजग

धमतरी। वरिष्ठ कांग्रेस नेता व पूर्व जिला पंचायत उपाध्यक्ष नीशू चंद्राकर ने केंद्र सरकार द्वारा लागू किए गए ‘विकसित भारत जी राम जी अधिनियम’ की आलोचना करते हुए इसे मजदूरों और ग्रामीण गरीबों के हितों के विरुद्ध बताया है। उन्होंने कहा कि यह अधिनियम ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की गारंटी को कमजोर करेगा और लाखों मजदूरों की आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।
नीशू चंद्राकर ने जारी बयान में कहा कि मनरेगा वर्षों से ग्रामीण परिवारों के लिए आर्थिक सहारा रही है। इसके माध्यम से जरूरतमंद मजदूरों को गांव में ही रोजगार उपलब्ध होता था, जिससे पलायन भी कम हुआ। उनका आरोप है कि नई व्यवस्था से मजदूरों के अधिकारों पर असर पड़ेगा और राज्यों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ेगा।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी शुरू से ही मजदूर, किसान और गरीब वर्ग के अधिकारों की लड़ाई लड़ती रही है। यदि इस अधिनियम से श्रमिकों के हित प्रभावित होते हैं तो कांग्रेस इसका लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करेगी और जरूरत पड़ने पर सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करती रहेगी।
श्री चंद्राकर ने कहा कि सरकार को किसी भी नई व्यवस्था को लागू करने से पहले मजदूर संगठनों, किसानों और संबंधित पक्षों से व्यापक चर्चा करनी चाहिए थी। उन्होंने मांग की कि श्रमिकों के हितों की पूरी सुरक्षा सुनिश्चित की जाए तथा रोजगार की गारंटी कमजोर करने वाले प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाए।
नीशू चंद्राकर ने कहा केंद्र सरकार इसे ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने वाला कदम बता रही है, जबकि कांग्रेस सहित कई विपक्षी दलों का कहना है कि इससे रोजगार गारंटी की मौजूदा व्यवस्था प्रभावित होगी. मनरेगा की परिकल्पना गरीबों को रोजगार देने के अधिकार का कानून था. इसमें लोगों और मजदूरों की आवाज थी. इस योजना ने हर गरीब व्यक्ति को 100 दिन के रोजगार की गारंटी दी थी. उन्होंने कहा कि अब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा इसे खत्म करना चाहते हैं. मनरेगा को 20 साल हो गए हैं. केंद्र की भाजपा सरकार ने इसे अब रद्द कर दिया . गांवों से पलायन रोकने में भी मनरेगा ने अहम भूमिका निभाई है. मनरेगा ने लोगों को जीवन जीने का आधार दिया. अब सरकार ने उस कानून को रद्द कर दिया है. नए कानून में जुमला दिया गया है कि इसमें 125 दिन रोजगार मिलेगा. अगर ऐसा होता तो हम खुशी मनाते. वे कहते हैं, सरकार को ज्यादा दिन रोजगार देना था तो मनरेगा में 25 दिन बढ़ा देते. केंद्र सरकार ने नए कानून में बजट का बोझ राज्य सरकारों पर डाल दिया है. जिससे इसका क्रियान्वयन भी मुश्किल है.

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