जिले के सरकारी अस्पातलों में है सिर्फ 10 विशेषज्ञ डाक्टर, गंभीर बीमारियों का इलाज हो रहा प्रभावित
स्वास्थ्य सुविधाओं का हो रहा विस्तार लेकिन डाक्टरों की कमी से सुविधाओं का क्या औचित्य ?
41 डाक्टर है कार्यरत, 48 पद है रिक्त, जल्द डाक्टरों की भर्ती है अत्यंत आवश्यक, निजी अस्पतालों में मंहगे ईलाज मजबूर है मरीज

धमतरी। जब गरीब व मध्यम वर्गीय मरीजों को शासकीय अस्पतालों में डाक्टर्स नहीं मिलते तो उन्हें अपनी सेहत सुधारने मजबूरी में निजी अस्पतालों में जाना पड़ता है। जहां महंगे फीस और महंगी दवाईयों का आर्थिक बोझ गरीब मरीजों को उठाना पड़ता है कई बार डाक्टरों द्वारा महंगे जांच की भी सलाह दी जाती है। जिससे हजारों रुपये इलाज में खर्च हो जाते है। यदि जिला अस्पताल सहित सभी शासकीय अस्पतालों में स्वीकृत पदों के अनुसार विशेषज्ञ डाक्टरों की नियुक्ति हो जाये तो गरीब व मध्यम वर्गीय मरीजों को महंगे उपचार से काफी हद तक राहत मिल पायेगी साथ ही शासकीय अस्पताल से मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने की आवश्यकता कम से कम पड़ेगी। जिले की सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था इन दिनों डॉक्टरों की भारी कमी से जूझ रही है। जिले के अस्पतालों में चिकित्सकों के दर्जनों पद लंबे समय से रिक्त होने के कारण मरीजों को समय पर उपचार नहीं मिल पा रहा है। अस्पतालों में एक डॉक्टर को कई जिम्मेदारी संभालनी पड़ रही है, जिससे इलाज की गुणवत्ता और स्वास्थ्य सेवाएं दोनों प्रभावित हो रही हैं। इसका सबसे अधिक असर ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों पर पड़ रहा है, जिन्हें विशेषज्ञ चिकित्सकों की अनुपलब्धता के कारण या तो घंटों इंतजार करना पड़ता है या फिर बड़े अस्पतालों के लिए रेफर किया जाता है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार जिले के विभिन्न सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के 91 स्वीकृत पद हैं, लेकिन इनमें से केवल 41 डॉक्टर ही कार्यरत हैं। यानी लगभग आधे से अधिक पद खाली पड़े हैं। वहीं 48 चिकित्सकों के पद रिक्त होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर असर पड़ रहा है। सबसे चिंताजनक स्थिति धमतरी जिला अस्पताल की है। यहां केवल 16 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 14 डॉक्टरों के पद खाली हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को लंबी कतारों में इंतजार करना पड़ता है। कई बार गंभीर मरीजों को भी विशेषज्ञ डॉक्टर नहीं मिलने से रायपुर या अन्य बड़े अस्पतालों के लिए रेफर करना पड़ता है।
इसी प्रकार सिविल अस्पताल नगरी में 14 स्वीकृत पदों में केवल 6 चिकित्सक कार्यरत हैं और 8 पद रिक्त हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गुजरा में 8 में से केवल 3 डॉक्टर उपलब्ध हैं। कुरूद मे सिर्फ 5 डॉक्टर कार्यरत है। मगरलोड मे 9 पद स्वीकृत हैँ 4 डॉक्टर कार्यरत हैँ और भखारा के अस्पताल 7 पद स्वीकृत हैँ 4 डॉक्टर कार्यरत हैँ.कई चिकित्सकीय पद खाली होने से शहरी व ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं।
डॉक्टरों की कमी का असर केवल ओपीडी तक सीमित नहीं है, बल्कि आपातकालीन सेवाएं, प्रसूति सेवाएं, सर्जरी, बच्चों और बुजुर्गों के उपचार जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं पर भी पड़ रहा है। कई अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों पर अतिरिक्त बोझ बढ़ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती रिक्त पदों को शीघ्र भरने की है। यदि समय रहते डॉक्टरों की नियुक्ति नहीं की गई तो आने वाले समय में मरीजों की परेशानियां और बढ़ सकती हैं।