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उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में प्रकृति का स्वर्णिम दौर

वन्यजीवों और पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी से मजबूत हो रहा पारिस्थितिकी तंत्र, आधुनिक तकनीक और जनसहभागिता से संरक्षण को मिली नई गति


धमतरी। छत्तीसगढ़ का उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व (यूएसटीआर) जैव विविधता संरक्षण के क्षेत्र में लगातार नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। यहां बाघ, तेंदुआ, भालू, गौर, जंगली कुत्ता, सांभर, चीतल, चौसिंगा, नीलगाय, जंगली सूअर सहित अनेक वन्यजीवों के साथ विभिन्न प्रजातियों के पक्षियों की लगातार दर्ज हो रही मौजूदगी इस बात का संकेत है कि रिजर्व का पारिस्थितिकी तंत्र पहले की तुलना में अधिक संतुलित और समृद्ध हुआ है। वन विभाग द्वारा संरक्षण कार्यों में आधुनिक तकनीकों का प्रभावी उपयोग किया जा रहा है। कैमरा ट्रैप से वन्यजीवों की नियमित निगरानी, जंगलों में गश्त, अवैध शिकार पर सख्त नियंत्रण, कृत्रिम जलस्रोतों का निर्माण, घासभूमि विकास, आग से बचाव के विशेष उपाय तथा वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण जैसे कई नवाचारों से वन क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रिजर्व में पक्षियों की बढ़ती संख्या भी पर्यावरणीय संतुलन का महत्वपूर्ण संकेत मानी जा रही है। विभिन्न स्थानीय और प्रवासी पक्षियों की मौजूदगी यह दर्शाती है कि जंगल में पर्याप्त भोजन, जल और सुरक्षित आवास उपलब्ध हैं। इससे पूरे वन क्षेत्र की जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूती मिल रही है। वन विभाग स्थानीय ग्रामीणों और ईको-डेवलपमेंट समितियों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित कर संरक्षण कार्यों को जनआंदोलन का स्वरूप देने का प्रयास कर रहा है। ग्रामीणों को वन एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूक करने के साथ-साथ वैकल्पिक आजीविका और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी आने के साथ संरक्षण कार्यों को भी मजबूती मिली है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी संरक्षित क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के जीव-जंतुओं और पक्षियों की निरंतर उपस्थिति उस क्षेत्र के स्वस्थ पर्यावरण और मजबूत खाद्य श्रृंखला का प्रमाण होती है। उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में लगातार मिल रहे ऐसे संकेत भविष्य के लिए बेहद उत्साहजनक हैं।
वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है – उप संचालक वरुण जैन
उप संचालक वरुण जैन ने कहा उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। आधुनिक तकनीक, वैज्ञानिक प्रबंधन और स्थानीय समुदाय की सक्रिय भागीदारी के माध्यम से हम जैव विविधता संरक्षण को और मजबूत बना रहे हैं। वन्यजीवों तथा पक्षियों की बढ़ती मौजूदगी हमारे संरक्षण प्रयासों की सफलता का सकारात्मक संकेत है। आने वाले समय में भी प्राकृतिक आवासों के संरक्षण, वन्यजीवों की सुरक्षा और पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए निरंतर नवाचार किए जाएंगे।
केवल बाघ संरक्षण का केंद्र नही, प्रकृति संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा यूएसटीआर
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व आज केवल बाघ संरक्षण का केंद्र नहीं, बल्कि समृद्ध जैव विविधता, संतुलित पारिस्थितिकी तंत्र और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से प्रकृति संरक्षण का एक सफल मॉडल बनकर उभर रहा है। वन विभाग को उम्मीद है कि भविष्य में भी इन प्रयासों से रिजर्व में वन्यजीवों की संख्या और जैव विविधता में निरंतर वृद्धि होगी।
मुख्य उपलब्धियां
:- कैमरा ट्रैप के माध्यम से वन्यजीवों की नियमित निगरानी।
:- जंगलों में सतत गश्त एवं अवैध शिकार पर प्रभावी नियंत्रण।
:- कृत्रिम जलस्रोतों और घासभूमि का विकास।
:- जंगलों को आग से सुरक्षित रखने के लिए विशेष प्रबंधन।
:- स्थानीय ग्रामीणों एवं ईको-डेवलपमेंट समितियों की सक्रिय भागीदारी।
:- जैव विविधता संरक्षण के लिए वैज्ञानिक और आधुनिक प्रबंधन प्रणाली का प्रभावी क्रियान्वयन।

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