मछली पालन से बढ़ी आय, जल संरक्षण से सशक्त हुई खेती, बदली आदिवासी परिवारों की जिंदगी
आजीविका डबरी बनी आत्मनिर्भरता की नई पहचान

धमतरी। शासन की ग्रामीण आजीविका उन्मुख योजनाएं आज जिले के अनेक परिवारों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला रही हैं। वीबी-जी राम जी के अंतर्गत निर्मित आजीविका डबरी केवल जल संरक्षण की संरचना नहीं, बल्कि ग्रामीण परिवारों के लिए स्थायी आय, कृषि उत्पादकता और आर्थिक आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार बन रही है। इसका उत्कृष्ट उदाहरण विकासखंड नगरी की ग्राम पंचायत भोथापारा के अनुसूचित जनजाति वर्ग के हितग्राही सावित्री/फकीर एवं फकीर/हलालखोर हैं, जिन्होंने निजी भूमि पर निर्मित आजीविका डबरी का उपयोग वैज्ञानिक ढंग से मछली पालन में कर अपनी आजीविका को नई दिशा दी है।
कुछ वर्ष पूर्व तक इन दोनों परिवारों की आय का प्रमुख स्रोत वर्षा आधारित खेती और दिहाड़ी मजदूरी था। सीमित कृषि भूमि, अनिश्चित मानसून और सिंचाई के अभाव के कारण वर्षभर नियमित आय सुनिश्चित नहीं हो पाती थी। आर्थिक कठिनाइयों के चलते कई बार परिवार के सदस्यों को रोजगार की तलाश में बाहर जाकर मजदूरी करनी पड़ती थी। ऐसे में भविष्य की योजनाएं बनाना भी चुनौतीपूर्ण था।इसी दौरान शासन की वीबी-जी राम जी योजना के अंतर्गत उनकी निजी भूमि पर आजीविका डबरी का निर्माण कराया गया। डबरी बनने से वर्षाजल का प्रभावी संचयन संभव हुआ और पूरे वर्ष खेतों के लिए जल उपलब्ध रहने लगा। जल उपलब्धता बढ़ने के साथ दोनों हितग्राहियों ने संबंधित विभाग के तकनीकी मार्गदर्शन में डबरी में गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज डालकर वैज्ञानिक पद्धति से मछली पालन प्रारंभ किया। नियमित देखभाल, संतुलित पूरक आहार तथा समय-समय पर तकनीकी सलाह का पालन करने से मछलियों की अच्छी वृद्धि हुई।
निर्धारित अवधि के बाद जब मछलियों का विक्रय किया गया, तब परिवारों को अपेक्षा से अधिक आय प्राप्त हुई। इस अतिरिक्त आय का उपयोग बच्चों की शिक्षा, कृषि निवेश, घरेलू आवश्यकताओं तथा पारिवारिक जरूरतों की पूर्ति में किया गया। इससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया और आत्मविश्वास भी बढ़ा। अब दोनों परिवार मछली पालन को नियमित व्यवसाय के रूप में अपनाकर भविष्य में इसका विस्तार करने की दिशा में कार्य कर रहे हैं।आजीविका डबरी का लाभ केवल मत्स्य पालन तक सीमित नहीं रहा। डबरी में संचित जल का उपयोग खेतों की सिंचाई में होने से फसलों की उत्पादकता में वृद्धि हुई तथा वर्षभर कृषि गतिविधियां संचालित करना संभव हुआ। इससे खेती की लागत कम हुई, उत्पादन बढ़ा और परिवारों को आय के अनेक स्रोत प्राप्त हुए। जल संरक्षण, सिंचाई और मत्स्य पालन का यह समन्वित मॉडल ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने का प्रभावी माध्यम बनकर सामने आया है।
सावित्री/फकीर एवं फकीर/हलालखोर बताते हैं कि यदि उन्हें आजीविका डबरी का लाभ नहीं मिला होता तो आज भी उनका परिवार मुख्यतः मजदूरी पर निर्भर रहता। आज वे आत्मनिर्भर हैं और अपने अनुभवों से गांव के अन्य किसानों एवं हितग्राहियों को भी डबरी का बहुउद्देशीय उपयोग कर मत्स्य पालन अपनाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। उनका मानना है कि कम लागत, उपलब्ध जल संसाधन और विभागीय तकनीकी मार्गदर्शन के साथ मछली पालन ग्रामीण परिवारों के लिए आय बढ़ाने का अत्यंत प्रभावी एवं टिकाऊ माध्यम बन सकता है।
धमतरी जिले में शासन द्वारा संचालन आजीविका संवर्धन एवं जल संरक्षण आधारित योजनाएं ग्रामीण विकास को नई गति प्रदान कर रही हैं। आजीविका डबरी जैसे नवाचार न केवल किसानों की आय में वृद्धि कर रहे हैं, बल्कि जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधनों के सतत उपयोग और आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था के निर्माण में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। भोथापारा के इन दोनों परिवारों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि शासन की योजनाओं का समुचित लाभ, तकनीकी मार्गदर्शन और हितग्राहियों की मेहनत मिलकर ग्रामीण विकास की नई इबारत लिख सकते हैं.



