कल्पसूत्र के माध्यम से धूमधाम से मनाया गया परमात्मा महावीर का जन्मकल्याणक महोत्सव

धमतरी। परम पूज्य प्रवर्तनी महोदया कैवल्यधाम तीर्थ प्रेरिका निपूर्णा श्री जी महाराज साहेब की सुशिष्या प्रवचन प्रवीणा परम पूज्य स्नेहयशा श्री जी महाराज साहेब की अंतेवासिनी परम पूज्य रत्ननिधी श्री जी महाराज साहेब आदि ठाणा 4 का धर्मनगरी धमतरी के श्री पाश्र्वनाथ जिनालय इतवारी बाजार में चातुर्मास हेतु विराजित है। परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने आज के प्रवचन के माध्यम से फरमाया कि हमने कल के प्रवचन में कल्पसूत्र के माध्यम से परमात्मा महावीर का जन्मकल्याणक महोत्सव बड़े धूमधाम से मनाया। आज परमात्मा के जन्म के बाद जन्म कल्याणक महोत्सव राजा सिद्धार्थ किस तरह से मनाते है। परमात्मा अपना जीवन किस तरह व्यतीत करते है। कल्पसूत्र के माध्यम से जानने और समझने का प्रयास किया गया। संसार में जब भी किसी परमात्मा का जन्म होता है तब तब नरक के जीवों को भी क्षण मात्र के लिए सुखानुभूति होती है साथ ही सम्पूर्ण 14 राजलोक भी एक पल के लिए प्रकाशित हो जाता है। हम सभी कल्पसूत्र के माध्यम से केवल परमात्मा का जन्मवाचन सुनकर आनंदित हो जाते है। तो विचार कीजिए जब वास्तव में परमात्मा का जन्म हुआ होगा। तब उस समय संसार के सभी जीवों को कितनी प्रसन्नता हुई होती। उस समय के आनंद के अनुभूति की केवल हम कल्पना कर सकते है। परमात्मा के जन्म के समय सभी राशियां अपने उच्च स्थान पर आ जाती है। ऐसा लगता है मानो सभी राशियां भी परमात्मा को बधाने आई है। परमात्मा के जन्म के बाद सभी इंद्र मेरुपर्वत पर जाकर परमात्मा का जन्मकल्याणक महोत्सव 1 करोड़ 60 लाख कलश से मनाते है। जन्मोत्सव मनाकर परमात्मा की उनकी माता त्रिशला के पास पुन: स्थापित करके उनके अंगूठे में अमृत का संचार करके सभी देव नंदीश्वर द्वीप के चले जाते है। वहां पर अ_ाई महोत्सव करके अपने अपने देवलोक में जाते है। जन्म के बारहवें दिन सिद्धार्थ राजा पुत्र का नाम करण करते है। और उनका नाम गुणनिष्पण नाम वर्धमान रखते है। भगवान महावीर के तीन नाम प्रसिद्ध हुए। माता पिता का दिया हुआ वर्धमान। राग द्वेष से रहित होकर तपस्या करने के कारण श्रमण। और सभी संकटों का वीरता पूर्वक सामना करने के कारण महावीर।