सामूहिक क्षमापना का कार्यक्रम : 84 लाख जीव योनियों से की गई क्षमायाचना
हमे परस्पर एक दूसरे से संसार के सभी जीवों से शुद्ध भावों के साथ क्षमा मांगना है और क्षमा करना है - परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी

धमतरी। परम पूज्य रत्ननिधि श्री जी महाराज साहेब ने फरमाया कि कल हम सभी ने संवत्सरी का प्रतिक्रमण किया है। प्रतिक्रमण के माध्यम से अपने पापों का प्रायश्चित तो कर लिया। अब प्रतिक्रमण के साथ साथ अपने मन के बैर को भी निकालना है। आज हमे अपने पापों का अन्तरहृदय से प्रायश्चित करते हुए उदार हृदय से दूसरों को क्षमा भी करना है। आज हमे 84 लाख जीवों से खमतखामणा करना है। क्योंकि हम अपराध केवल उनके प्रति नहीं करते जिनसे हम मिलते है या जिनके साथ रहते है। बल्कि उनसे भी खमतखामना करना है जिनसे कभी मिले ही नहीं है। क्योंकि अप्रत्यक्ष रूप से अपराध किसी के प्रति भी हो सकता है। हमे जीवन में दूसरों को क्षमा करने से पहले स्वयं क्षमा मांगने का कार्य करना है। क्योंकि क्षमा मांगने के लिए विशाल हृदय का होना जरूरी है। हमारा तो प्रयास यह होना चाहिए कि अनजाने में भी हमसे कोई भूल न हो। ज्ञानी भगवंत कहते है कि अगर हम गतवर्ष में किए गए पापों का प्रायश्चित नहीं करते है तो वह कर्म निकाचित हो जाता है। फिर उसे भोगना ही पड़ता है। अगर समय पर हम उसका प्रायश्चित कर ले तो उस पापमय कर्म को भोगने से बच सकते है। हम सबसे अधिक भाव के कारण अपना भव बिगाड़ते है। इसलिए प्रयास करना चाहिए कि किसी भी दशा में हमारा भाव न बिगड़े। आज हमे परस्पर एक दूसरे से संसार के सभी जीवों से शुद्ध भावों के साथ क्षमा मांगना है और क्षमा करना है। परम पूज्य श्राध्यनिधि श्री जी महाराज साहेब ने फरमाया कि चातुर्मास काल के दौरान पर्यूषण पर्व आता है। और पर्यूषण पर्व के आठवें दिन संवत्सरी पर्व मनाते है। उसके अगले दिन क्षमायाचना करते है। सामूहिक क्षमापना के इस कार्यक्रम में अक्षयनिधि तप, समवशरण तप, विजयकशाय तप, मोक्ष तप एवं अ_ाई तपस्या एवं उससे ऊपर की तपस्या करने वाले सभी तपस्वियों का श्रीसंघ की ओर से स्वागत किया गया। सामूहिक क्षमापना के कार्यक्रम में भंवरलाल छाजेड़, मदनलाल चौरडिया, संतोष पारख, विजय गोलछा, अशोक राखेचा, धरमचंद पारख , निर्मल बरडिया, राकेश लोढ़ा, वीरेंद्र गोलछा, सुरेश गोलछा, पूनम गोलछा, लक्ष्मीलाल लूनिया, लूणकरण गोलछा, पारसमल गोलछा, नेमीचंद छाजेड़, कोमल बोहरा, आकाश गोलछा, कुशल चोपड़ा, मनोज कटारिया, सुरेश गोलछा, प्रतीक बैद, अंकित बरडिया, सतीश नाहर, प्रकाश पारख, चम्पालाल भंसाली, सतीश बरडिया, नितिन बरडिया, सहित बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित रहे।
जैन धर्म अहिंसा प्रधान है इसलिए जिनशासन में क्षमायाचना की व्यवस्था की गई है – सीईओ जयंत नाहटा
सामूहिक क्षमा याचना कार्यक्रम में मुख्य अतिथि जयंत नाहटा जिला पंचायत धमतरी सीईओ ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा प्रधान है। अहिंसा हमारा प्राण है। यही कारण है कि जिनशासन में क्षमायाचना की व्यवस्था है। गत वर्षों में जाने अनजाने हमसे जो कोई भी त्रुटि हुई हो उसके लिए संसार के सभी जीवों से क्षमायाचना करते है। जैन श्वेतांबर मूर्ति पूजक संघ की ओर से निर्मल बरडिया ने कहा कि सबसे पहले मैं 84 लाख जीवों से क्षमायाचना करता हु। साथ ही अपनी ओर से एवं जैन श्वेता. मूर्तिपूजक संघ की ओर से आप सभी से क्षमायाचना करता हूं। जिनशासन में ही यह संभव है कि हम अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांग भी सकते है और क्षमा कर भी सकते है । कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जयंत नाहटा की ओर से विकलांग शिविर लगाने का प्रस्ताव आया है। मै श्रीसंघ की ओर से आपको आश्वस्त करता हूँ कि आने वाले समय में समाज की ओर से विकलांगों हेतु भव्य शिविर लगाया जाएगा। स्थानकवासी संघ की ओर से कोमल बोहरा ने खमतखामना की।
