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दिन रात मेहनत के बाद भी बीड़ी मजदूरों को नहीं मिल रहा सम्मानजनक मेहताना

सालों से शोषित और पीडि़त है बीड़ी मजदूर, शासन की योजनाओं का भी नहीं मिल पा रहा लाभ

धमतरी। समय के साथ सभी कामगारों के मेहताने पर सम्मानजनक वृद्धि हुई लेकिन कुछ ऐसे भी मजदूर वर्ग के लोग हैं जो आज भी शोषित और पीडि़त हैं इनमें एक वर्ग बीड़ी मजदूर है, जो दिन रात मेहनत करके भी दो वक्त की रोटी के लायक रकम नहीं कमा पा रहे हैं सालों से कम मजदूरी के चलते उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हो पा रहा है. मिली जानकारी के अनुसार बीड़ी मजदूरों को 1000 बीड़ी बनाने पर 100 से 120 रुपए मजदूरी दी जाती है और इतना बीड़ी बनाने में एक मजदूर को सुबह से रात हो जाता है बीड़ी बनाने के लिए मजदूरों को सिर्फ कच्चा माल दिया जाता है जिसे काट छाट कर सुधार कर बीड़ी बनाने लायक तैयार किया जाता है. मजदूरों ने बताया कि कंपनियों द्वारा बीड़ी बनवाने तेंदूपत्ता, तंबाकू, धागा दिया जाता है लेकिन संख्या के हिसाब से प्रदान किया गया समान कम पड़ता है जिसे उन्हें बाहर से खरीदना पड़ता है इसमें स्वयं का पैसा लगाना पड़ता है। तेंदूपत्ता को फार्मा से एक निर्धारित माप के अनुसार काटकर बीड़ी बनाया जाता है इसके बाद भी प्रक्रिया खत्म नहीं होती जब मजदूर द्वारा बीड़ी जमा करने जाया जाता है तो वहां के मुंशियों द्वारा बीड़ी में कमियां निकाल कर रख लिया जाता है। इस प्रकार इसमें भी नुकसान बीड़ी बनाने वालो का ही होता है। शासन द्वारा बीड़ी मजदूरों को पंजीकृत श्रमिकों को श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में पंजीयन पश्चात इन्हें भी सभी सुविधायें मिल सकता है। लेकिन अनेक बीड़ी मजदूरों को श्रमिक कार्ड का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कई मजदूरों को तो योजनाओं और उनके लाभ की जानकारी भी नहीं है। मेडिकल, पेंशन, भविष्यनिधि, शिक्षा आदि योजनाओं का लाभ इन्हें मिल सकता है।


हो रहा बीड़ी मजदूरों का मोह भंग
ज्ञात हो कि पिछले दशक तक जिले में बड़ी संख्या में बीड़ी मजदूर थे। महिलाओं के अतिरिक्त पुरुष व बच्चे भी बीड़ी बनाने के कार्य में लगे रहते थे। लेकिन बढ़ती मंहगाई और मामूली मजदूरी के चलते अन्य कार्य में लोगो की रुचि बढ़ती गई जिन घरो में पहले पूरा परिवार बीड़ी बनाता रहा है। उनके बच्चे अन्य नौकरी व्यवसाय में संलग्न होने पर घर वाले भी इस कार्य से तौबा करने लगे इसलिए पिछले कुछ सालों में बीड़ी मजदूरों की संख्या लगातार घटी है। और जिस प्रकार मेहनत के हिसाब से मजदूरी नहीं मिल रही उससे भविष्य में मजदूर और घट सकते है।

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