लाखों की इंसीनीरेटर मशीन सालों से खा रही धूल, जनता के पैसो का हुआ दुरुपयोग
मुर्गा, मटन, मछली आदि मांस वाले कचरे के निष्पादन के उद्देश्य से खरीदा गया था मशीन

सही तरीके से निष्पादन नहीं होने से गंदगी और बदबू का कारण बनता है मांस युक्त कचरा
धमतरी। सभी प्रकार के कचरे का निष्पादन एक ही तरीके से नहीं किया जा सकता है। इसलिए निगम द्वारा सालों पहले मटन युक्त कचरे के निष्पादन हेतु लाखों की लागत से इंसीनीरेटर मशीन की खरीदी की लेकिन खरीदी के पश्चात इस मशीन का उपयोग ही नहीं हो पाया। जिससे लोगों को लगने लगा है यह पूरी तरह से जनता के पैसो की बर्बादी है। बता दे कि नगर पालिका से नगर निगम बनने के बाद पहला शहरी निकाय चुनाव भाजपा ने जीता इसके बाद भाजपा शासनकाल में ही लगभग 20 लाख रुपये की लागत से इंसीनीरेटर मांस, मटन और मछली दुकानों से निकले वाले कचरे और अन्य हाईजेनिक कचरे (जैसे सेनेटरी पैड) आदि का उचित निष्पादन करना था। लेकिन विडम्बना है कि उक्त मशीन का सदुपयोग नगर निगम आज तक कर नहीं पाई। नतीजन लाखों की इंसीनीरेटर मशीन धूल खाते पड़ी है। कचरा निष्पादन करने वाली यह मशीन खुद कचरे के रुप में बिना उपयोग के है। अब सवाल उठता है कि आखिरकार लाखों की इस मशीन का उपयोग किया क्यो नहीं गया? क्या मशीन में कुछ खराबी है और यदि ऐसा है तो इसमें सुधार करवा कर इसका उपयोग किया जा सकता है। बता दे कि इंसीनीरेटर मशीन एक प्रकार का भस्मक मशीन होता है जिसमें किसी प्रकार का कचरा डालने पर मशीन उस कचरे को भस्म (राख) में बदल देता है। इसके माध्यम से कचरा निष्पादन से कचरे से संक्रमण आदि फैलने का खतरा नहीं रहता है।

अव्यवस्थित है मांस, मछली की दुकाने
शहर में कई स्थानों पर मांस मछली की दुकाने है। दुकानों के संचालन के दौरान धार्मिक स्थानों को भी नजर अंदाज किया जाता है। इतवारी बाजार के अतिरिक्त शहर में कंही भी मांस का विक्रय होता है। कुछ दुकानदारों द्वारा मांस कटिंग बिक्री के बाद निकलने वाले कचरे के निष्पादन हेतु स्वच्छता को ध्यान रखते है और आबादी से दूर फेंकते है लेकिन कुछ दुकानदारों द्वारा कंही भी इस कचरे को फेंक दिया जाता है। जिससे यह सड़कर दुर्गंध फैलाते है। इससे कई तरह के बीमारियों का खतरा बना रहता है। कुत्ते भी इस मांस के कचरे को यहां-वहां फैलाते रहते है। कई दुकानदारों द्वारा निगम के कचरा गाड़ी और डस्टबीन में मांस वाले कचरे को फेंकते है लेकिन निगम के पास भी इसके बेहतर निष्पादन की व्यवस्था नहीं है।
