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सरस्वती शिशु मंदिर है बच्चों में संस्कार का प्रमुख केंद्र – दीपक सिंह ठाकुर


धमतरी। सरस्वती शिशु मंदिर मड़ाईभाठा में शाला का वार्षिक उत्सव कार्यक्रम हुआ इस कार्यक्रम में अध्यक्षता के रूप में दीपक सिंह ठाकुर हिंदू जागरण मंच प्रांत छत्तीसगढ़ और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत का सेवा प्रमुख मोहनलाल साहू , गणेश राव पवार, पर्यावरण प्रेमी समाजसेवी शत्रुघ्न पांडे, जितेन्द्र यदु, अमन राव , सुरेन्द्र, जनक उपस्थित हुए। वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में छात्र-छात्राओं द्वारा वाद्य यंत्र संगीत के साथ मनमोहक नृत्य प्रहसन आदि की प्रस्तुतिकरण हुआ । इस अवसर पर दीपक सिंह ठाकुर ने कहा कि वर्तमान समय में जो शिक्षा पद्धति चल रही है उससे कहीं अधिक श्रेष्ठ सिलेबस की आवश्यकता विद्यालयों को है हमें माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक विद्यालयों में भारतीय संविधान राजनीति विज्ञान लोक प्रशासन भारत और विश्व का इतिहास भौगोलिक संरचना आदि को भी सारगर्भित रूप से सभी बच्चों को सीखना चाहिए। बच्चों को पढ़ते समय ध्यान रखना चाहिए की बच्चे रटने से ज्यादा समझने का प्रयास करें क्योंकि समझ के आधार पर ग्रहण की गई शिक्षा मस्तिष्क पटल पर आजीवन रहती है । उसे कभी भी बच्चे नहीं भूलते और यही शिक्षा उन्हें अपने अधिकारों देश के प्रति कर्तव्यों का ज्ञान देती है और समाज में बच्चों को कैसे अच्छा नागरिक बनकर अपना जीवन निर्वाह कर देश के लिए योगदान हेतु प्रेरित करती है । इन सबके अतिरिक्त एक एनसाइक्लोपीडिया नामक विषय प्रत्येक कक्षा में बच्चों को उच्च स्तर की शिक्षा देने हेतु होनी चाहिए। हमारे शिक्षा विभाग को चाहिए की हमारे चारों वेद, 18 पुराण, उपनिषद दर्शन, पंचतंत्र रामायण, महाभारत जैसे महाकाव्य इन सभी को कक्षा एक से लेकर 12वींतक बच्चों को सिखाया जाए । अपने राज्य और अपने देश की परंपरा संस्कार और संस्कृति सभी से बच्चों को भली भांति परिचित कराया जाए । सरस्वती शिशु मंदिर मातृ विद्यालय नहीं है अपितु जीवन जीने की कला सिखाने वाला संस्थान है । इस अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ छत्तीसगढ़ प्रांत सहसेवा प्रमुख मोहन लाल साहु ने कहा कि हमें अपने बच्चों को जीजा बाई, देवी अहिल्याबाई होलकर, रानी दुर्गावती, झांसी की रानी लक्ष्मीबाई, भगतसिंह, चंद्रशेखर आजाद, वीर शिवाजी आदि देशभक्तों की जीवनगाथा अपने बच्चों के साथ लोगों को भी बताएं जिन्होंने राष्ट्रहित, देशहित में अपना सब कुछ न्यौछावर कर अद्वितीय कार्य किया।

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