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धमतरी की महानदी जलाशय परियोजना है छत्तीसगढ़ की लाईफ लाईन, सवा 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि की होती है सिंचाई

सिंचाई, बीएसपी पानी सप्लाई, पर्यटन, मत्स्यपालन, ७विद्युत उत्पादन, पेयजल व निस्तारी आदि उद्देश्यों की हो रही पूर्ति

आज विश्व जल दिवस : स्वच्छ, सुरक्षित, जल उपलब्धता व जल संरक्षण पर दिया जा रहा जोर

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धमतरी। हर साल विश्व जल दिवस 22 मार्च को मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के सभी देशों में स्वच्छ एवं सुरक्षित जल की उपलब्धता सुनिश्चित करवाना है साथ ही जल संरक्षण के महत्व पर भी ध्यान केंद्रित करना है। जल दिवस पर जिले के जल स्त्रोत व उनकी उपयोगिता को याद किया जा रहा है। धमतरी जिले में प्राकृतिक जल संसाधनों को बांध के रुप में सिंचिंत कर न सिर्फ धमतरी जिले बल्कि प्रदेश वासियों को कई प्रकार की जल सुविधाएँ मुहैय्या कराने का सराहनीय कार्य किया गया है।
ज्ञात हो कि महानदी जलाशय परियोजना की नींव 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्व. इंदिरा गांधी ने 5 जून को रखी थी, जो 8 साल में बनकर तैयार हुई और उदघाटन सन् 1980 में हुआ। उस समय हेड वर्क यूनिट और फीडर केनाल बनाने में 29.15 करोड़ रुपए की लागत आई थी। यहां से सिंचाई सुविधा मिलने से अंचल में हरित क्रांति आई है। इस परियोजना को बहुउद्देशीय परियोजना के रूप में परिवर्तित करने के लिए गंगरेल नामक ग्राम के निकट महानदी में बांध बनाया गया, इसलिए इसे गंगरेल बांध या महानदी परियोजना के नाम से जाना जाता है। इससे सिंचाई के अतिरिक्त मत्स्य पालन, औद्योगिक क्षेत्रों को जलापूर्ति, जल विद्युत उत्पादन, पर्यटन, पेयजल व निस्तारी आदि उद्देश्यों की पूर्ति हो रही है। यह बांध शीर्ष पर 1375.75 मीटर लंबा तथा 32 मीटर ऊंचा है। इसका जलग्रहण क्षेत्र 3670 वर्ग किमी तथा इसकी कुल भंडारण क्षमता 90932 हेक्टेयर मीटर है। इस बांध से रायपुर, बलौदाबाजार, अभनपुर, धमतरी, कुरूद, तिल्दा तथा भाटापारा तहसीलों की लगभग सवा 2 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि सिंचाई होती है। इसके अतिरिक्त भिलाई स्टील प्लांट, रायपुर नगर निगम, धमतरी को भी पानी जरूरत अनुसार नियमित दिया जाता है। इस जलाशय के बनने से 22 राजस्व ग्राम एवं 3 वनग्राम पूर्ण रूप से और 27 राजस्व ग्राम आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। इन 52 ग्रामों में से 12 ग्रामों की स्थिति ऐसी थी कि उनकी आबादी का क्षेत्र डूब क्षेत्र से बाहर था, इसलिए उन्हें बसाहट के लिए अन्य ग्रामों में नहीं जाना पड़ा। बांध की स्थापना 1978 में की गई है। यह महानदी पर निर्मित है। यह राज्य का सबसे लम्बा बांध है, जिसकी कुल ऊंचाई – 1365 मीटर है। गंगरेल बांध में कुल 14 गेट है। बांध की जल भराव क्षमता 32.150 टीएमसी है। यहाँ 10 मेगावाट जल विद्युत परियोजना संचालित है।
दुनिया के 1.6 बिलियन लोग जूझ रहे है स्वच्छ, सुरक्षित जल आपूर्ति की समस्या से
ब्राजील में रियो डी जेनेरियो में वर्ष 1992 में आयोजित पर्यावरण तथा विकास का संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन द्वारा आयोजित कार्यक्रम में विश्व जल दिवस मनाने की पहल की गई तथा वर्ष 1993 में संयुक्त राष्ट्र ने अपने सामान्य सभा के द्वारा निर्णय लेकर इस दिन को वार्षिक कार्यक्रम के रूप में मनाने का निर्णय लिया । इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों के बीच में जल संरक्षण का महत्व साफ पीने योग्य जल का महत्व आदि बताना था। 1993 में पहली बार विश्व जल दिवस मनाया गया था और संयुक्त राष्ट्र संघ ने 1992 में अपने एजेंडा 21 में रियो डी जेनेरियो में इसका प्रस्ताव दिया था। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, लगभग 4 बिलियन लोग वर्ष में कम से कम एक महीने के लिए पानी की भारी कमी का अनुभव करते हैं और लगभग 1.6 बिलियन लोग दुनिया की आबादी का लगभग एक चौथाई एक स्वच्छ, सुरक्षित जल आपूर्ति तक पहुँचने में समस्याएं हैं।
महानदी परियोजना (1980)
यह छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना है। इस परियोजना से धमतरी रायपुर व दुर्ग जिले में सिंचाई सुविधा उपलब्ध है महानदी जलाशय परियोजना के अंतर्गत 6 जलाशय एवं महानदी पोषक नहर और सोंदूर पोषक नहर सम्मिलित है महानदी जलाशय परियोजना में मुरूमसिल्ली (1923), दुधावा (1963), रविशंकर जलाशय / गंगरेल बांध (1978) सिकासर (1979), सोंदूर (1988), एवं पैरी हाईडेम सम्मिलित है।
रुद्री बैराज चार जिलों की है जीवन रेखा
जल संसाधन विभाग के अनुसार इसकी स्थापना 1915 में की गई। यह महानदी पर निर्मित है। यह प्रदेश की पहली निर्मित परियोजना है। 1993 में रुद्री पिक-अप वियर का स्थान रुद्री बैराज ने लिया। ब्रिटिश शासन काल के दौरान रुद्री में महानदी पर बैराज का निर्माण किया गया था। यहां ब्रिटिश कालीन तकनीक और स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना देखा जा सकता है। बड़े-बड़े पत्थरों को एक आकार में काटकर इनकी जोड़ाई चूने से की गई थी, जो अब मजबूत स्थिति में है, लेकिन रुद्री बैराज चार जिलों की जीवन रेखा है। इनमें धमतरी जिले के साथ बालोद, रायपुर, बलौदाबाजार जिले शामिल हैं। इस बैराज से महानदी मुख्य नहर के जरिए 6 लाख 60 हजार एकड़ खेतों की फसलों को सिंचाई सुविधा मिल रही है। साथ ही सैकड़ों गांवों और रायपुर-धमतरी शहर के लोगों को पेयजल व निस्तारी सुविधा उपलब्ध हो रही है। फसलों की सिंचाई के लिए बैराज से 116 किमी लंबी मुख्य नहर बनाई गई है।
एशिया का पहला सायफन बांध है मुरूमसिल्ली
इसकी स्थापना 1914 और 1923 के बीच हुई। यह जलाशय सिलियारी नदी पर स्थित है। इस जलाशय का निर्माण एलफिस्टन द्वारा की गई थी तथा यह एशिया का पहला सायफन बांध है। इस जलाशय का नाम परिवर्तन कर बाबू छोटे लाल श्रीवास्तव के नाम पर रखा गया है।
स्वत्रंता प्राप्ति के पश्चात यह राज्य का पहला बांध है दुधावा जलाशय
दुधावा जलाशय कांकेर जिला में स्थित है। इसकी स्थापना 1962 में की गई थी। यह भी महानदी पर निर्मित है। स्वत्रंता प्राप्ति के पश्चात यह राज्य का पहला बांध है। बांध का निर्माण 1953 ई. में शुरू हुआ और 1963 ई. में समाप्त हुआ। इस बांध की ऊंचाई 24.53 मीटर और लंबाई 2906.43 मीटर है। दुधवा बांध, सिहावा पर्वत से 21 किमी और कांकेर से 30 किमी दूर स्थित दुधवा गांव में महानदी नदी पर बनाया गया है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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