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गंगरेल में पर्यटन को बढ़ावा देने नहीं हो रहे नये प्रयास

एक्वेरियम, जू, पुरातत्व संग्राहलय, व्यू प्वांईट जैसे कई नवाचार से पर्यटन को मिल पायेगा बूस्ट

गंगरेल बांध में नहीं रह गया कोई आकर्षक एडवेंचर्स एक्टिविटी

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धमतरी। गंगरेल बांध की ख्याति दूर दूर तक फैली है धमतरी के अलावा पूरे प्रदेश भर में पर्यटक यहां घूमने आते है। लेकिन यहां उम्मीद के अनुरुप पर्यटन का विकास नहीं हो पाया। नतीजन पर्यटक आते तो है लेकिन उन्हें एंजाय व एंडवेचर्स के नाम पर ज्यादा कुछ नसीब नहीं हो पाता है। गंगरेल बांध में जल भराव क्षमता 32.150 टीएमसी है। बांध विशाल महानदी पर बना हुआ है। बांध का प्राकृतिक दृश्य मनमोहक है। चारो ओर हरी भरी वादियों के बीच अथाह पानी दृश्य को और भी ज्यादा आकर्षक और मोहक बनाता है। गंगरेल बांध में समय के साथ पर्यटन को बूस्ट देने कई नवाचार करने की आवश्यकता महसूस हो रही है। सालों पहले बोटिंग की सुविधा शुरु की गई है। इसके बाद से कुछ नया नहीं हो पाया है। वाटर एक्टिविटी में भी कमी आई है। अब ज्यादातर बोटिंग ही होता है। ऐसे में पर्यटको का मनोरंजन करने कई नये प्रयास जैसे एक्वेरियम, जू, संग्रहालय आदि खोला जा सकता है। गंगरेल में वैसे ही पर्यटक पहुंचते है ऐसे में इस दिशा में प्रयास होंगे तो पर्यटकों की संख्या और भी बढ़ सकती है। आज धमतरी व आसपास के जिलो के दूरदराज के लोग जू में जंगली जानवरों को देखने भिलाई, नया रायपुर जाते है। वहीं एक्वेरियम में अनेक प्रकार के मछलियों को निहारने की सुविधा धमतरी में नहीं है। गंगरेल में इससे भी पर्यटन को बढ़ावा मिल सकता है। गंगरेल में संग्राहालय का निर्माण भी एक अच्छा प्रयास साबित हो सकता है। व्यू प्वांईट भी गंगरेल में वॉच टावर बनाकर बनाया जा सकता है। जिससे बांध के खूबसूरत नजारे का और भी अच्छे तरीके से दीदार हो सकें। लोगों की माने तो नवाचार तो कई हो सकते है। लेकिन इसके लिये मजबूत नेतृत्व और इच्छाशक्ति की आवश्यकता है जो कि अब तक स्थानीय जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों में नजर ही नही आई है। लोगों के अनुसार गंगरेल बांध के पर्यटन का बड़ा कारण मां अंगारमोती भी है। भक्तो की भीड़ ही पर्यटन को बढ़ावा देती है।
मानव वन बदहाल
सालों पहले पर्यटकों के मनोरंजन और पर्यटन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से मानव वन का निर्माण बांध के पास किया गया लेकिन सालों से मानव वन बदहाल है। यहां एंट्री फीस 20 रुपये लिया जाता है। जबकि यहां 20 रुपये वसूलने लायक को चीज नहीं रह गई है। मचानहट है जो बुकिंग पर एंट्री दी जाती है। वुडन कॉर्टज है जो कि आम लोगों के जद से बाहर है क्योंकि किराया ज्यादा है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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