Uncategorized

हास्य, व्यंग्य के प्रसिद्ध कवि सुरजीत नवदीप का निधन

जिले सहित प्रदेश भर में अपने अलग शैली के लिए रहे ख्याति प्राप्त


धमतरी। धमतरी के साहित्य जगत में शोक की लहर है। धमतरी हिंदी साहित्य समिति के संरक्षक सुरजीत लोकप्रिय मंच संचालक तथा जिला नवदीप अब नहीं रहे। 88 साल के नवदीप नगर के उपाध्याय नर्सिंग होम में सोमवार रात्रि करीब 9.25 बजे अंतिम सांस ली। 11 सितंबर से वे भर्ती थे। उनके निधन से धमतरी ही नहीं बल्कि पूरे प्रदेश का साहित्यिक समाज शोकाकुल है।
जिले सहित प्रदेश भर में अपनी अलग शैली के चलते ख्याति प्राप्त कवि रहे। उनकी रचनाएं, उनकी आवाज, उनकी उपस्थिति मंचों को जीवंत बनाती थी। साहित्य प्रेमी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर उनकी स्मृतियों को साझा कर रहे हैं। उनकी अंतिम यात्रा मंगलवार को दोपहर 2 बजे निवास स्थान डाक बंगला वार्ड से निकाली गई।
समाज की विसंगतियों पर गंभीर चिंतन के साथ युवा पीढ़ी के लिए रहे प्रेरणास्रोत
सुरजीत नवदीप छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के सदस्य भी रह चुके थे। हास्य और व्यंग्य की सहज शैली में गंभीर सामाजिक मुद्दों को प्रस्तुत करने की कला उनके व्यक्तित्व की पहचान थी। वे मंच पर जहां हास्य का रस घोलते थे। वहीं समाज की विसंगतियों पर गंभीर चिंतन भी प्रस्तुत करते थे। युवा पीढ़ी के लिए वे प्रेरणास्रोत बने। उनकी लेखनी, हास्य की सहज शैली, समाज की जटिलताओं पर व्यंग्यात्मक टिप्पणी और मंचीय उपस्थिति ने उन्हें पूरे देश में एक सुरजीत नवदीप का जन्म 1 जुलाई 1937 को मंडी भवलदीन, पंजाब (जो वर्तमान में पाकिस्तान में स्थित है) में हुआ। उन्होंने उच्च शिक्षा प्राप्त कर एमए (हिंदी) के साथ बीएड और सीपीएड की उपाधियां अर्जित की।
शिक्षा के क्षेत्र में सेवा देने के पश्चात स्वतंत्र लेखन और साहित्य सेवा में रहे सक्रिय
शिक्षा के क्षेत्र में दीर्घकालीन सेवा देने के बाद वे सेवानिवृत्त होकर स्वतंत्र लेखन और साहित्य सेवा में सक्रिय रहे। नवदीप का नाम हिंदी हास्य-व्यंग्य कविता में सम्मानपूर्वक लिया जाता है। उन्होंने न केवल कविताओं का लेखन किया, बल्कि देश की विविध पत्र-पत्रिकाओं में गीत, गजल, हास्य-व्यंग्य कविता और कहानियों का प्रकाशन भी किया। रेडियो और दूरदर्शन में अनेक बार काव्यपाठ तथा कार्यक्रमों का संचालन कर साहित्य प्रेमियों के बीच लोकप्रियता अर्जित की। लाजवंती का पौधा (उपन्यास), हवाओं में भटकते हाथ (काव्य संग्रह), कुर्सी के चक्कर में (काव्य संग्रह), शब्दों का अलाव, आंसू हंसते हैं, रावण कब मरेगा? (काव्य संग्रह), खाओ पीयो खिसको, बुढ़ापा जिन्दाबाद इन कृतियों में समाज की विसंगतियों, मानवीय संवेदनाओं, राजनीतिक व्यंग्य तथा हास्य की सहजता को अभिव्यक्ति मिली।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!