मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा उसी घर में अपने परिजनों के बीच निवास करती है : डॉ उपाध्याय

धमतरी। सर्व पितृमोक्ष अमावश्या पर रविवार को चित्रोत्पला गंगा नदी के किनारे रूद्रेश्वर धाम में स्वर्गधाम सेवा समिति ने विधि-विधान से 690 अनजान मृतकों का तर्पण कर सामूहिक पिंडदान किया। सुबह 10 बजे पूजा शुरू हुई। पंडित रामअवतार तिवारी ने हिन्दू रीति-रिवाज के तहत पूजा-अर्चना कराई। इसके बाद पिंडदान कर नदी में तर्पण कराया गया। दोपहर 1 बजे पितृ तर्पण पर डॉ रोशन उपाध्याय ने व्याख्यान दिए। स्वर्गधाम सेवा समिति के मंच में पितृ दूतों की सेवा में लगे लोगों को भी सम्मानित किया गया। श्वान की सेवा करने वाले पीयूष पारख, पुष्पेन्द्र वाजपेयी, काजल जैन, सिमरन कौर, भारतेषू मिश्रा, गौ सेवक मनीष फूटान, विजयंत रणसिंह, देवेन्द्र फूटान, नीरज पांडे का सम्मान किया गया। इसके अलावा सर्प मित्र सूर्यकांत साहू, लावारिश लाशों के अंतिम संस्कार में महत्वपूर्ण सेवा देने वाले संतोष सार्वा को भी सम्मानित किया गया। मंच में चित्रकूट से पधारे संत जुगलकिशोर वैष्णव ने भी पितृ पक्ष पर अपने विचार रखें। समिति के अध्यक्ष एवंत गोलछा,महासचिव अशोक पवार ने कहा कि पितृ पक्ष के 16 दिन को पितरों के त्योहार के रूप में मनाना चाहिए।इस साल 690 अनजान लाशों का तर्पण व पिंडदान किया गया। हिन्दू धर्म में पितृ दूतों का विशेष महत्व है। शहर में कई ऐसे लोग हैं जो गाय,श्वान,काग की सेवा कर रहे। ऐसे लोगों को भी इस साल सम्मानित किया गया है। पितृ तर्पण पर डॉ रोशन उपाध्याय ने व्याख्यान दिए। उन्होंने कहा कि जीवन की पूर्णता मृत्यु के साथ ही पूरी होती है। प्रारब्ध सुख-दुख भोगने के बाद मन और आत्मा शरीर छोड़ देती है इसे ही मृत्यु कहते हैं। मृत्यु के बाद 13 दिनों तक आत्मा उसी घर में अपने परिजनों के बीच निवास करती हैं। दशगात्र के दिन आत्मा को अधिकाय (दूसरा) शरीर की प्राप्ति होती है, इसे दशगात्र कहते हैं। 13 वें दिन आत्मा घर को छोडकऱ यमलोक के लिए निकल जाती है। 348 दिन में आत्मा अधिकाय शरीर को धारण कर यमलोक पहुंचती है। यह समय पृथ्वी में बरसी का समय होता है। डॉ उपाध्याय ने कहा कि सालभर में 15 दिन के लिए पितर मृत्युलोक में आते हैं। मृत्यु लोक का 15 दिन पितरों के लिए 60 मिनट (1 घंटे) के बराबर होता है। प्रत्येक दिन पितरों के लिए 4 मिनट के बराबर होता है। इस तरह 15 दिन में पितर सिर्फ 60 मिनट यानी 1 घंटे के लिए पृथ्वी पर आते हैं। आजकल कुछ लोग सनातन धर्म में पितरों के लेकर बताई गई बातों को आडम्बर, फिजूलखर्ची बताकर लोगों को दिग्भ्रमित करने का प्रयास कर रहे हैं। जबकि शास्त्रों में दशगात्र व तर्पण की पूरी विधि बताई गई है। शास्त्रों में श्राद्ध के 96 प्रकार बताए गए हैं। आज हम यहां श्राद्ध के 5 प्रमुख विधियों के बारे में जानकारी देंगे। पहला नित्य श्राद्ध, दूसरा नांदीमुख श्राद्ध, तीसरा तीर्थादि श्राद्ध, चौथा एकोदिश और पांचवा पार्वण श्राद्ध। कार्यक्रम में विधायक ओंकार साहू, महापौर रामू रोहरा, पूर्व विधायक रंजना साहू, डॉ सीएस चौबे, अर्जुनपुरी गोस्वामी, सियाराम साहू, डोमर सिंह दादरा, डॉ जेएल देवांगन, दानीराम साहू, एनआर यादव, गौकरण सिन्हा, चंपालाल साहू, विनीता पवार, वंदना पवार, उषा श्रीवास्तव, जगजीवन सिंह सिद्धू, तीरथराज फूटान, अमनगिरी गोस्वामी, किशोर, कैलाश सोनी, विशाल गौरी, विकास शर्मा, सुनीता पवार, डॉ रविकिरण शिंदे, डॉ राकेश सोनी आदि उपस्थित थे।
