Uncategorized

माटी बस्तर की अनकही कहानी का आज से एसआरएम प्रशांत सिनेमा में शुरु हुआ प्रदर्शन

शुभारंभ अवसर पर महापौर रामू रोहरा सहित गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित, उठाया फिल्म का लुत्फ

हजारों निर्दोष ग्रामीणों, शहीद जवानों और आत्मसमर्पितों की मौन गाथा है फिल्म माटी

धमतरी । चन्द्रिका फिल्म्स प्रोडक्शन की बहुप्रतीक्षित छत्तीसगढ़ी फिल्म माटी आज से प्रदेशभर के सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई। धमतरी के एसआरएम प्रशांत में भी आज दोपहर 12 बजे से फिल्म का प्रदर्शन प्रारंभ हुआ। इस शुभारंभ अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में महापौर रामू रोहरा विशेष रुप से एसआरएम प्रशांत सिनेमा में उपस्थित रहे। साथ ही जिला भाजपा महामंत्री महेन्द्र पंडित एसआरएम प्रशांत के संचालक ललित नाहटा, रोहित लुंकड़, पार्षद संतोष सोनकर, संजय देवांगन, अज्जु देशलहरे, मेघराज ठाकुर, नम्रता पवार, भाजयुमों जिलाध्यक्ष कैलाश सोनकर, विजय ठाकुर, दमयंतीन गजेन्द्र, सरिता यादव, महेन्द्र खण्डेलवाल, ईश्वरी पटवा, कुमार रणसिंह, गोपाल साहू, सहित अन्य गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। सभी ने बहुप्रतिक्षित फिल्म माटी देखा। फिल्म देखने के बाद महापौर सहित सभी ने फिल्म की जमकर सराहना की और सभी से फिल्म देखने की अपील की।
उल्लेखनीय है कि बस्तर वह धरती, जिसने दशकों तक गोलियों की गूंज और अनकहे दर्द को सहा। आज वही माटी, अपनी दबी हुई आवाज़ और दिल की सच्चाई लेकर बड़े परदे पर बोलने जा रही है। यह केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि उस मिट्टी की आत्मा की पुकार है जिसे निर्माता संपत झा और निर्देशक अविनाश प्रसाद ने चार वर्षों के अथक समर्पण से कैमरे में अमर कर दिया है। माटी की कथा भीमा और उर्मिला के निष्कलुष प्रेम की है, जो बस्तर की रक्तरंजित जमीन पर पनपता है जहाँ संघर्ष, भय और उम्मीद एक साथ सांस लेते हैं।यह उन हजारों निर्दोष ग्रामीणों, शहीद जवानों और आत्मसमर्पितों की मौन गाथा है, जिनकी पीड़ा इतिहास के पन्नों में कभी दर्ज नहीं हुई, पर जिन्होंने इस माटी को अपने लहू और विश्वास से सींचा। असली बस्तर की धड़कन, बस्तर की मिट्टी की खुशबू के साथ है. निर्माता संपत झा का कहना है इस फिल्म का उद्देश्य बस्तर की नकारात्मक छवि को तोड़कर, उसकी सच्ची पहचान, उसकी संस्कृति और अपनत्व को दुनिया के सामने लाना है।यह फिल्म बस्तर की वास्तविक तस्वीर पेश करती है जहाँ दर्द के साथ-साथ प्रेम, लोकगीतों की लय और जंगलों की हरियाली भी सांस लेती है।हर किरदार, हर चेहरा बस्तर की सच्चाई से जुड़ा है।फिल्म में स्थानीय कलाकारों, शिक्षकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, और सबसे विशेष, करीब 40 आत्मसमर्पित माओवादियों ने अभिनय किया है। यह केवल अभिनय नहीं, बल्कि जीवन से निकली हुई अभिव्यक्ति है।भीतरी अहसासों का निर्देशन निर्देशक अविनाश प्रसाद कहते हैं जब हमने कैमरा बस्तर की घाटियों की ओर मोड़ा, तो वहाँ सिर्फ दृश्य नहीं थे वहाँ आत्मा की गहराई तक उतर जाने वाली अनुभूतियाँ थीं।उनके निर्देशन में बस्तर का हर दृश्य एक भावनात्मक अनुभव में बदल जाता है जहाँ हर ध्वनि, हर चुप्पी कुछ कहती है। एक सच्ची श्रद्धांजलि है.फिल्म की पूरी टीम ने ह्यमाटीö को उन दिल दहला देने वाली घटनाओं के प्रति श्रद्धांजलि बताया है, जिन्होंने बस्तर की नियति को हमेशा के लिए बदल दिया।निर्माता संपत झा भावुक होकर कहते हैं इस फिल्म में कोई नायक या खलनायक नहीं है यहाँ सिर्फ इंसान हैं, जिनके पास दर्द है, उम्मीद है और अपने बस्तर से गहरा प्रेम है। जब वायरल तस्वीरों को लेकर हमें धमकियाँ मिलीं, जांचें हुईं तब भी हम नहीं रुके। क्योंकि यह माटी हमारा ऋण है, जिसे हम उतारना चाहते थे.बस्तर के लोकगीतों की मधुर गूंज, प्राकृतिक सौंदर्य की अनुपम छटा और इस मिट्टी का अपनापन हर दर्शक के हृदय को गहराई से स्पर्श करेगा।माटी केवल एक फिल्म नहीं, बल्कि बस्तर की संस्कृति, संवेदना और प्रेम का जीवंत दस्तावेज़ है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!