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नवीन भूमि गाइडलाइन दरों में वृद्धि और ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता के विरोध में धमतरी चेम्बर ऑफ कॉमर्स द्वारा किया गया ज्ञापन प्रेषित

आम नागरिक एवं व्यापार जगत पर पडऩे वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ व उससे उत्पन्न मंदी के संबंध में अवगत कराकर की गई विचार करने की मांग

नई गाईडलाईन दर व ट्रेड लाईसेंस अनिवार्यत: से आम जनता व व्यापार को होगा नुकसान – दिनेश रोहरा

धमतरी। छग चेम्बर आफ कामर्स के प्रदेश उपाध्यक्ष व धमतरी चेम्बर आफ कामर्स के संस्थापक सदस्य दिनेश (राजा) रोहरा, धमतरी चेम्बर ऑफ कॉमर्स जिला-धमतरी के संरक्षक नरेन्द्र रोहरा सुनील जैन, अध्यक्ष कैलाश कुकरेजा, उपाध्यक्ष रविन्दर सिंह छाबड़ा, सह-सचिव आलोक पाण्डेय, मितेश जैन, रमेश दिवानी, अर्जुन दास जसवानी, अमित अग्रवाल ललित बरडिय़ा, सतराम वाशानी, भगत राज देवांगन सहित सभी सदस्यों द्वारा रूपकुमारी चौधरी, सांसद महासमुंद लोक सभा क्षेत्र सहित रमेन डेका राज्यपाल, विष्णु देव साय मुख्यमंत्री, ओपी चौधरी वित्तमंत्री, सांसद बृजमोहन अग्रवाल को ज्ञापन प्रेषित कर प्रदेश की नवीन भूमि गाइडलाइन दरों में वृद्धि और ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता से आम नागरिक एवं व्यापार जगत पर पडऩे वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ व उससे उत्पन्न मंदी के संबंध में अवगत कराकर इस पर विचार करने की मांग की गई।
ज्ञापन में उल्लेख है कि राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जमीनों की गाइडलाइन दरों में की गई वृद्धि और ट्रेड लाइसेंस की अनिवार्यता को लेकर हम आपका ध्यान इसके उस भयावह आर्थिक प्रभाव की ओर आकर्षित करना चाहते हैं, जो न केवल व्यापार को, बल्कि प्रदेश के हर परिवार के बजट को असंतुलित कर रहा है। हमारा यह विश्लेषण निम्नलिखित तों पर आधारित है, जिसे नकारा नहीं जा सकता कि गाइडलाइन वृद्धि केवल निवेश नहीं, आम आदमी के घर के सपने पर प्रहार है। गाइडलाइन की दरें बढऩे का सीधा अर्थ केवल जमीन महंगी होना नहीं है, बल्कि इससे स्टाम्प ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन शुल्क भी बढ़ गया है। इसका कास्केडिंग इम्पैक्ट यह है कि कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और दुकानों का संपत्ति कर गाइडलाइन आधारित होने से दुकान का किराया बढ़ेगा, जिससे अंतत: वस्तुओं के दाम बढ़ेंगे और महंगाई की मार आम उपभोक्ता पर पड़ेगी। एक मध्यमवर्गीय परिवार जो जीवनभर की पूंजी लगाकर घर बनाना चाहता है, उसके लिए अब यह सपना असंभव होता जा रहा है। निर्माण लागत और जमीन की लागत का यह दोहरा बोझ उन्हें आर्थिक रूप से तोड़ रहा है।
हम जीएसटी के माध्यम से पहले ही वन नेशन, वन टैक्स की व्यवस्था में अपना योगदान दे रहे हैं। इसके बावजूद, स्थानीय निकायों द्वारा ट्रेड लाइसेंस के नाम पर नया शुल्क थोपना, दोहरे कराधान जैसा प्रतीत होता है। यह प्रक्रिया व्यापारियों को अपने मूल कार्य से हटाकर कागजी कार्यवाही और दफ्तरों के चक्कर लगाने पर मजबूर कर रही है। इससे भ्रष्टाचार और इंस्पेक्टर राज को बढ़ावा मिलेगा, जो आपकी सरकार की सुशासन की नीति के सर्वथा विपरीत है। अर्थशास्त्र का नियम है कि यदि कर और अनुपालनका बोझ बढ़ता है, तो क्रय शक्ति घटती है। जब व्यापार मंदा होगा, तो सरकार को मिलने वाला जीएसटी संग्रह भी स्वभाविक रूप से गिरेगा। अत: यह तात्कालिक लाभ के लिए, दीर्घकालिक राजस्व की बलि देने जैसा है। अत: विनम्र आग्रह है कि जनहित और प्रदेश हित में नवीन गाइडलाइन दरों को तत्काल प्रभाव से वापस लिया जाए और ट्रेड लाइसेंस की जटिल प्रक्रिया को समाप्त किया जाए।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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