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केन्द्र सरकार ने न सिर्फ गांधी जी का नाम हटाया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी कुचला है

ओंकार साहू, गुरुमुख सिंह होरा, तारिणी चन्द्राकर, शरद लोहाना, पंकज महावर, लेखराम साहू ने मनरेगा के स्वरुप में बदलाव को बताया श्रमिको के अधिकार के विरुद्ध


धमतरी। मनरेगा के स्वरुप में बदलाव का कांग्रेस द्वारा पूरजोर विरोध किया जा रहा है। लगातार विभिन्न आंदोलनो के माध्यम से विरोध जारी है। इसी कड़ी में धमतरी विधायक ओंकार साहू, पूर्व विधायक व वर्तमान पीसीसी उपाध्यक्ष गुरुमुख सिंह होरा, कांग्रेस जिलाध्यक्ष तारिणी चन्द्राकर पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष शरद लोहाना, प्रदेश कांग्रेस सं. सचिव पंकज महावर, पूर्व विधायक व कांग्रेस के ओबीसी विभाग के राष्ट्रीय समन्वयक लेखराम साहू ने कहा कि मनरेगा में पहले हर परिवार को न्यूनतम 100 दिनों के काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, हर गांव में काम की कानूनी गारंटी मिलती थी, पूरे साल काम की मांग कर सकते थे, कानूनी न्यूनतम मज़दूरी की गारंटी दी गई थी, ग्राम पंचायत के जरिए अपने ही गांव के विकास के लिए काम मिलता था, काम में मनरेगा मेट और रोजगार सहायकों की मदद मिलती थी, मज़दूरी का 100 प्रतिशत भुगतान केंद्र सरकार करती थी, इसलिए राज्य सरकार बिना किसी चिंता या कठिनाई के काम उपलब्ध कराती थी। लेकिन मोदी सरकार द्वारा किये जा रहे बदलाव के बाद अब आपके पास कोई कानूनी गारंटी नहीं रहेगी, काम केवल मोदी सरकार द्वारा चुने गए गांवों में ही मिलेगा। फसल कटाई के मौसम में काम नहीं मिलेगा, मजदूरी सरकार अपनी मर्जी से तय करेगी, अब कहां और क्या काम करेंगे, यह सरकार तय करेगी, अब किसी मेट या रोजगार सहायक की मदद नहीं मिलेगी, अब राज्य सरकारों को आपकी मजदूरी का 40 प्रतिशत हिस्सा खुद देना होगा खर्च बचाने के लिए हो सकता है राज्य मजदूरों को काम ही न दें।
नेताओं ने आगे कहा कि मोदी सरकार ने मनरेगा की मूल आत्मा को ही खत्म करके श्रमिकों से काम का अधिकार छीना है.मनरेगा कानून में परिवर्तन मोदी सरकार का श्रमिक विरोधी कदम है। यह महात्मा गांधी के आदशों पर कुठाराघात है, मजदूरों के अधिकारों को सीमित करने वाला निर्णय है। मोदी सरकार ने सुधार के नाम पर झांसा देकर लोकसभा में एक और बिल पास करके दुनिया की सबसे बड़ी रोजग़ार गारंटी स्कीम मनरेगा को खत्म कर दिया है। यह महात्मा गांधी की सोच को खत्म करने और सबसे गरीब भारतीयों से काम का अधिकार छीनने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। मनरेगा गांधी जी के ग्राम स्वराज, काम की गरिमा और डिसेंट्रलाइज्ड डेवलपमेंट के सपने का जीता-जागता उदाहरण था, लेकिन इस सरकार ने न सिर्फ उनका नाम हटा दिया है, बल्कि 12 करोड़ मनरेगा मज़दूरों के अधिकारों को भी बेरहमी से कुचला है। दो दशकों से, मनरेगा करोड़ों ग्रामीण परिवारों के लिए लाइफलाइन रहा है। इस बिल से आने वाले समय में मनरेगा स्कीम खत्म हो जाएगी। जैसे ही बजट का बोझ राज्य सरकारों पर पड़ेगा, वैसे ही धीरे-धीरे मनरेगा बंद होने लगेगी।मोदी सरकार अब राज्यों पर जी राम जी का लगभग 50,000 करोड़ का बोझ डालना चाहती है, उन्हें 40 प्रतिशत खर्च उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है.मनरेगा योजना देश के गरीब से गरीब लोगों के लिए रोजगार का सहारा थी, जो कोरोना जैसे मुश्किल हालातों में भी उनके साथ थी। इसलिए ये बिल गरीब मजदूरों के खिलाफ है। भाजपा भगवान राम के नाम पर एक बार फिर झूठ बोल रही है। वी बी जी .राम.जी .में जो राम जी बता रहे उसमें कही भी भगवान राम नही है. वी बी जी .राम.जी . का फूल फार्म है (विकसित भारत-गारंटी फॉर रोजगार और आजीविका मिशन-ग्रामीण) है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

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