भारत सरकार द्वारा अमेरिकी द्विपक्षीय व्यापार समझौता में हस्ताक्षर न करने की मांग को लेकर छत्तीसगढ़ किसान यूनियन ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

छत्तीसगढ़ किसान यूनियन जिला धमतरी क़े घनाराम साहू सहित अन्य किसानों ने कलेक्टर अबिनाश मिश्रा को ज्ञापन सौंपा जिसमे उल्लेख है कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा घोषित भारत अमेरिका दि्वपक्षीय व्यापार समझौते ने अत्यंत गंभीर परिस्थिति उत्पन्न कर दी है यह प्रतीत होता है कि भारत सरकार ने एक साम्राज्यवादी शक्ति के दबाव में आगे झुक कर देश की आत्म निर्भरता और संप्रभुता को संकट में डाल दिया है ट्रंप की घोषणा से स्पष्ट है कि अंतरिम समझौते में स्वीकार की गई शर्त भारतीय अर्थव्यवस्था और किसानों के हित के लिए घातक है यह अत्यंत चिंताजनक है कि भारत सरकार ने इन शर्तों पर पूर्ण मौन साथ रखा है एक साम्राज्यवादी महाशक्ति के समक्ष इस प्रकार का समर्पण किसानों में गंभीर असंतोष पैदा कर रहा है हम छत्तीसगढ़ राज्य के किसान देश के अन्नदाता होने के नाते यह द्विपक्षीय जी समझौता किसान के हित होने में शंका पैदा हो रहा है भारत में जहां अमेरिकी कृषी उत्पादों पर 30 रुपए से 150 रुपए प्रति तक शुल्क शून्य करने पर सहमति दी है वहीं अमेरिका भारतीय उत्पाद 18 प्रतिशत शुल्क लगाएगा जो पहले के औसत से 2.5 प्रतिशत से लगभग 7 गुना ज्यादा है इसे 50% राहता बताना यह दर्शाता है कि भारतीय वार्ताकार दबाव में है या केंद्र सरकार और संसद दोनों के लिए शर्मनाक है सस्ते रूसी कच्चे तेल बंद करना तथा अमेरिका को ऐसी आयतों की निगरानी की अनुमति देना अन्यथा 25 प्रतिशत दणात्मक शुल्क आदेश फरमान किया जाना नींदनीय है.अमेरिका में 18.65 लाख किसान है जबकि भारत में किसान परिवारों की संख्या 11.10 करोड़ है अमेरिका में किसानों को भारी सब्सिडी दी जाती है और तकनीकी के साथ आधुनिकरण की कृषि किया जाता है अमेरिका में प्रति किसानों को 21 लाख 56000 रुपए के बराबर इनकी सब्सिडी है तो अमेरिकी किसान सस्ते दर में अपनी फसलों का उत्पादन और बिक्री सस्ते दर में कर सकते हैं भारत की किसानों को सब्सिडी नहीं के बराबर मिलती है ऐसे भारत के किसान अमेरिका के किसानो का प्रतिस्पर्धा नहीं कर पाएगा भारत के किसानों को खाद के रूप में ही कुछ सब्सिडी मिलती है और पीएम सम्मन निधि के तहत प्रति वर्ष 6 हजार की मामूली राशि मिलती है यहां के किसानों को बिजली डीजल पेट्रोल कृषि उपकरण पर नकारात्मक सब्सिडी मिलती हैं
इस प्रकार से विदेशी कृषि उपज शुल्क मुक्त आयात के कारण डेयरी, फल सब्जी कपास गनना मक्का धान गेहूं के कृषि करने वाले किसान पूरी तरह से तबाह हो जाएंगे अमेरिका के आयात से भारतीय किसानों की फसल की किमते गिरेगी इस प्रकार से यहां की किसानों को अच्छी कीमत के लिए भारी संकटों का सामना करना पड़ सकता है अतः भारत अमेरिका की द्वीपक्षिय समझौता भारत के किसान हित में नहीं है इस समझौता को तत्काल रद्द किया जावे।
