Uncategorized

उमैर व अहमद ने 6 साल की उम्र में रोजा रखकर पेश की मिसाल

रमजान का आज 21 वां रोजा, अल्लाह की इबादत में बच्चे भी पीछे नहीं


धमतरी। अगर इरादा मजबूत हो तो कठिन से कठिन कार्य करने के लिए भी उम्र मायने नहीं रखती, फिर कार्य धार्मिक हो तो ऐसी ईश्वरीय ताकत मिलती है कि हर चुनौती को पार कर मिसाल कायम कर लिया जाता है। यह बात 6 साल की उम्र में रोजा रखने पर उमैर मिर्जा व अहमद गोरी पर सटीक बैठती नजर आती है। 17 घण्टे से अधिक समय तक भूखे प्यासे रहकर रोजा रखना आसान नहीं था लेकिन दोनों बच्चों ने जता दिया कि आत्म संयम से मुश्किल लगने वाले कार्य को भी सम्भव किया जा सकता है। विदित हो कि रमजान का पवित्र माह चल रहा है। आज 21वे रोजे के साथ इस मुबारक माह का तीसरा अशरा शुरू हो गया है। पहला अशरा रहमत का, दूसरा मगफिरत का तथा तीसरा अशरा जहन्नम से आजादी का माना जाता है। मुस्लिम समाज के लोग अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए ज्यादा से ज्यादा इबादत कर रहे है, इसमे बड़ो के साथ बच्चे भी पीछे नहीं है। 6 साल की उम्र में रोजा रखने वाले उमैर के पिता जुनैद मिर्जा ने बताया कि इस्लाम मे छोटी उम्र के बच्चों के लिए रोजा रखना अनिवार्य नहीं है। उमैर ने जब रोजा रखने की जिद किया तो परिवार ने उसे पहले समझाने का प्रयास किया लेकिन जब वह नहीं माना तो उसका जज्बा देखते हुए इजाजत दे दी। पहले लगा था कि उमैर के लिए रोजा रख पाना आसान नही होगा लेकिन अपनी इच्छा शक्ति से उसने रोजा पूरा किया। इसी तरह अहमद गोरी के पिता मो रजा गोरी ने बताया कि बाकी दिनों में बच्चों के लिए दिनभर भूखे प्यासे रहना संभव नहीं लगता लेकिन रमजान में अल्लाह की रहमत बरसती है, इस माह की नेअमत ही ऐसी है कि बड़ो के साथ बच्चे भी रोजा पूरा कर लेते है। ऐसे बच्चे बड़ी तादाद में है जो अल्लाह की रजा हासिल करने के लिए रोजा रख रहे हैं। इधर दोनों बच्चों के रोजा रखने पर परिवार ने इनके लिए इफ्तारी का विशेष इंतजाम किया, इफ्तार के बाद फूल माला पहनाकर इस्तकबाल करने के साथ ही इनाम दिया। इधर ईद को अब महज 9 दिन रह गए है। ईद को लेकर रोजा रखने वाले बच्चों में खास उत्साह है।

Ashish Kumar Jain

Editor In Chief Sankalp Bharat News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button
error: Content is protected !!